पटना

तेजस्वी यादव ने NDA सरकार को बताया 'खटारा', तो जेडीयू नेता को आया गुस्सा; लालू-राबड़ी को लपेटा

Bihar Politics: एनडीए सरकार को 'खटारा' बताने पर जदयू ने तेजस्वी यादव पर पलटवार किया है। नीतीश के करीबी नेता ने कहा है कि बिहार के जर्रे-जर्रे को लूटने वाले आज विकास की बात कर रहे हैं। इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में बयानबाजी और वार-पलटवार का सिलसिला तेज हो चुका है।

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तेजस्वी यादव vs नीतीश कुमार

Bihar Chunav: बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक दिन पहले राज्य की एनडीए सरकार को "खटारा सरकार" बताया था, जिसके बाद जदयू ने रविवार को जोरदार पलटवार किया है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि जिन्होंने 15 साल तक बिहार को लूटा, वे आज विकास पर सवाल उठा रहे हैं। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा था कि बिहार में 15 साल पुरानी गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं है, तो फिर एनडीए की 20 साल पुरानी 'जोड़-तोड़, पलटा-पलटी वाली खटारा सरकार' क्यों चलेगी?

तेजस्वी यादव को जेडीयू नेता ने जमकर सुनाई खरी-खोटी

जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने रविवार को एक वीडियो बाइट जारी किया है, जिसमें उन्होंने राजद पर जोरदार निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव अपनी संपत्ति बढ़ाने में मशगूल हैं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार को आगे बढ़ाने में जुड़े हुए हैं। 15 साल तक लालू यादव और राबड़ी देवी के परिवार ने बिहार के जर्रे-जर्रे को लूट लिया है, वे आज विकास की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सेवा की राजनीति करते हैं और तेजस्वी अपने परिवार की राजनीति करते हैं।

जदयू नेता ने आगे कहा कि घोटाला की राजनीति नहीं, बिहार की जनता विकास की राजनीति चाहती है। जर्रे-जर्रे को लूटने वालों को लोकसभा चुनाव में जनता ने राजनीति के औकात पर लाकर खड़ा किया था और 2025 के विधानसभा चुनाव में भी लूटने वालों को जनता दरकिनार करेगी।

बिहार सरकार के लिए क्या बोले थे पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी?

तेजस्वी यादव ने 'एक्स' पर अपने पोस्ट में लिखा था, "बिहार में 15 साल पुरानी गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं है क्योंकि वे ज्यादा धुआं फेंकती हैं, प्रदूषण बढ़ाती हैं, जनता के लिए हानिकारक हैं, तो फिर एनडीए की 20 साल पुरानी जोड़-तोड़, पलटा-पलटी वाली खटारा सरकार क्यों चलेगी? नीतीश सरकार ने विगत 20 साल में बिहार के हर गली-हर टोला-हर गांव में गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अपराध और पलायन रूपी भयंकर प्रदूषण फैला दिया है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश-भाजपा सरकार ने 20 वर्षों में दो पीढ़ियों का जीवन बर्बाद कर दिया। अब यह सरकार बिहारवासियों पर बोझ बन चुकी है। अब इसे बदलना अति आवश्यक है। बिहार के युवाओं ने ठान लिया है कि अब 20 साल पुरानी "खटारा, जर्जर, बीमार और थकी हुई" अविश्वसनीय नीतीश-एनडीए सरकार को हटा कर एक नई सोच, नए विजन, नए जोश और नई दिशा वाली युवा एवं नौकरी-रोजगार और विकास कार्यों को समर्पित विश्वसनीय जुनूनी सरकार को लाना है तथा नया बिहार बनाना है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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