Pune News: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ सोमवार को पुणे की सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित परीक्षार्थियों ने आयोग के खिलाफ विशाल 'आक्रोश मोर्चा' निकाला। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज और आयोग विरोधी तख्तियां लेकर चल रहे छात्रों ने आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।
जंतर-मंतर जैसा माहौल, सरकार जिम्मेदारी से बात करे: सुप्रिया सुले
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले और पार्टी नेता रोहित पवार भी छात्रों के समर्थन में इस आक्रोश मोर्चे में शामिल हुए। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि महाराष्ट्र में हमारे बच्चों को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है। आज पुणे में जंतर-मंतर जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। मैं सरकार से अपील करती हूं कि वह किसी जिम्मेदार व्यक्ति को यहां भेजे और छात्रों से सीधी चर्चा करे... ये बच्चे अन्याय सह रहे हैं और यह उनके भविष्य और करियर से जुड़ा सवाल है। एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने भी इस पूरे प्रकरण में MPSC के वर्तमान अध्यक्ष विवेक भीमनवार के तुरंत इस्तीफे की मांग उठाई है।
MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार की सफाई: "घटना मेरे पदभार संभालने से पहले की है"
व्यक्तिगत आरोपों और इस्तीफे की मांग के बीच MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 18 फरवरी 2026 को शपथ ली थी और 3 मार्च 2026 को अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था, जबकि परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताएं जनवरी 2026 में हुई थीं, यानी उनके पदभार ग्रहण करने से पहले। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया में गोपनीयता भंग होने की शिकायतों के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है। आयोग ने इस संबंध में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई है तथा भविष्य के सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय आंतरिक समिति का गठन किया है।
6 गिरफ्तार, नंदुरबार से रुतुजा पाटिल हिरासत में
ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए ऑफलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा 22 मार्च 2026 को महाराष्ट्र के 6 संभागीय मुख्यालयों में आयोजित की गई थी, जिसके परिणाम 12 जून को घोषित किए गए थे। हालांकि, 22 से 26 जुलाई के बीच आयोग को शिकायतें मिलीं कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से दो दिन पहले (20 मार्च को) ही प्रश्नपत्र मिल गए थे।
मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने 26 अगस्त को परीक्षा की गोपनीयता भंग करने के आरोप में 6 लोगों को गिरफ्तार किया। इसके बाद क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने मुख्य आरोपी रुतुजा पाटिल को नंदुरबार से हिरासत में लिया। पुलिस ने यह मामला महाराष्ट्र प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया है।
