Patna Advocate Murder: बिहार की राजधानी पटना में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे कानून के जानकारों और रक्षकों को भी खुलेआम निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला सुल्तानगंज थाना क्षेत्र का है, जहां शनिवार को दिनदहाड़े अज्ञात बदमाशों ने एक अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या कर दी। इस सनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में वकील की हत्या
घटना सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर इलाके में स्थित टीचर ट्रेनिंग स्कूल के पास की है, जो इलाहाबाद बैंक के समीप है। मृतक की पहचान 58 वर्षीय जितेंद्र कुमार महतो के रूप में हुई है, जो पेशे से एक वकील थे और लंबे समय से पटना में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत थे।
अपराधियों ने की गोलियों की बारिश
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें जितेंद्र महतो को तीन गोलियां लगीं—एक पेट में, दूसरी सिर में, और तीसरी शरीर के अन्य हिस्से में। गोलीबारी की आवाज सुनकर इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायल अधिवक्ता को तुरंत पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की। घटनास्थल से दो खोखे बरामद किए गए हैं, जिससे यह साफ होता है कि हमलावर पूरी योजना और तैयारी के साथ आए थे। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी है और इलाके में जांच अभियान चला रही है।
परिवार में मातम, उठे कई सवाल
घटना के बाद मृतक के घर में कोहराम मच गया है। परिजनों ने बताया कि जितेंद्र कुमार महतो एक सरल और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे और उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर उन्हें क्यों मारा गया? क्या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश, पेशेगत विवाद या फिर संपत्ति संबंधी मामला था—यह सब अभी जांच का विषय है।
राजधानी में बढ़ते अपराध और लचर कानून व्यवस्था
इस घटना ने राजधानी पटना में लचर कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है। लगातार हो रही आपराधिक घटनाएं, खासकर दिनदहाड़े हत्या जैसी वारदातें, इस बात की ओर इशारा करती हैं कि अपराधियों को न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन की पकड़ का डर। यह घटना न केवल अधिवक्ताओं बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है। यदि राजधानी में दिनदहाड़े एक वकील को गोली मारी जा सकती है, तो आम जनता कितनी सुरक्षित है—यह सवाल अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।
