पटना

कैसे होगा इलाज? भभुआ सदर अस्पताल के OPD पर 25 तरह की दवाएं नहीं

भभुआ के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी के चलते गरीब मरीजों को महंगी दवाइयां खरीदने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। सदर अस्पताल, अनुमंडल, रेफरल, सीएचसी और पीएचसी में आवश्यक दवाओं की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

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भभुआ सदर अस्पताल (फाइल फोटो)

भभुआ : जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी से मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिला भंडार कक्ष से दवाएं अस्पतालों में पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन काउंटर पर समय पर नहीं पहुंचने के कारण मरीजों को आवश्यक दवाएं नहीं मिल रही हैं। सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल मोहनियां, और रामगढ़ रेफरल अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में कई आवश्यक दवाएं अनुपलब्ध हैं। गरीब मरीजों को महंगे दामों पर दवाएं खरीदने में कठिनाई हो रही है, जिससे उनका इलाज प्रभावित हो रहा है।

ओपीडी काउंटर पर 160 प्रकार की दवाएं उपलब्ध

हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक, सदर अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर 160 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि 185 प्रकार की दवाएं होनी चाहिए। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पतालों में दवाओं की मांग बढ़ रही है। पिछले जनवरी में बीएमएसआईसीएल से 450 प्रकार की दवाएं मांगी गई थीं, जो अप्रैल से जून तक भेजी जा रही हैं। हालांकि, दवाओं की आपूर्ति में देरी हो रही है। सदर अस्पताल में प्रतिदिन 500 से 600 मरीज स्वास्थ्य जांच के लिए आ रहे हैं, जिनमें सर्दी, खांसी, बुखार, और डायरिया के मरीज शामिल हैं। अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि वे दवाओं को समय पर अपने अस्पतालों में ले जाएं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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