Delhi Police ने CJP Protest से जुड़े मामलों में दर्ज 13 FIR को रद्द करने और 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ अलग से एक नई FIR दर्ज करने की अनुमति देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस याचिका की कॉपी टाइम्स नाउ नवभारत के पास एक्सक्लूसिव मौजूद है। आज ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI के समक्ष इस मामले की कल ही सुनवाई की मांग की थी। यह आवेदन यशोवर्धन आजाद एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में दाखिल किया गया है। इस याचिका पर अब कल यानी मंगलवार 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
25 जुलाई के केंद्र के फैसले का दिया हवाला
दिल्ली पुलिस ने अपनी अर्जी में कहा है कि 25 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसले के बाद दिल्ली पुलिस 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच CJP प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। आवेदन में इन FIR की पूरी सूची भी दी गई है।
इन मामलों में दंगा, हत्या के प्रयास और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान जैसे आरोपों से जुड़ी धाराएं लगाई गई थीं। कुछ FIR में BNS के साथ-साथ PDPP Act की धाराएं भी शामिल हैं।
13 FIR को खत्म करने की मांग
अर्जी में 21 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के बीच दर्ज कुल 13 FIR का जिक्र है। इनमें बाराखंभा रोड, कर्तव्य पथ, पार्लियामेंट स्ट्रीट, मंदिर मार्ग, कनॉट प्लेस और पटेल स्ट्रीट सहित दिल्ली के अलग-अलग थानों में दर्ज मामले शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन FIR को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए रद्द करने की मांग की है।
2873 लोगों के लिए अलग FIR की मांग
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने एक नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। पुलिस के मुताबिक NCRB के डेटाबेस के आधार पर 2873 ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास है और जो प्रथम दृष्टया प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे।
पुलिस का कहना है कि इन लोगों की भूमिका की जांच करना जरूरी है कि क्या वे प्रदर्शन के दौरान शारीरिक नुकसान या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े अपराधों में शामिल थे।
इसी आधार पर दिल्ली पुलिस ने इन 2873 लोगों के खिलाफ एक नई और विशेष FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। पुलिस ने कहा है कि इस FIR की जांच सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त 2026 के आदेश में 'criminal antecedents' शब्द को लेकर दी गई स्पष्टता के अनुरूप होगी।
आगे कोई नई FIR नहीं होगी
दिल्ली पुलिस ने अपनी अर्जी में साफ किया है कि इस आवेदन में शामिल घटनाओं को लेकर इसके बाद कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। पुलिस ने कहा है कि अगर इन्हीं घटनाओं के संबंध में कोई दूसरी FIR बाद में सामने आती है या राज्य के संज्ञान में आती है, तो संबंधित पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से इसी तरह की राहत मांगने का विरोध नहीं किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ये भी मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट यह भी स्पष्ट करे कि इस मामले में दिया गया आदेश विशेष परिस्थितियों तक सीमित होगा और भविष्य के मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा। यह आवेदन 31 अगस्त 2026 को दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया है।
