दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम गायब होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नामों का छूटना गंभीर चिंता का विषय है और इस प्रक्रिया के पैमाने को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसा। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए, क्योंकि दिल्ली की ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट में 47 लाख से ज़्यादा वोटरों के नाम शामिल नहीं थे। ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने 'X' पर कहा कि लगभग 1.5 करोड़ वोटरों में से 47 लाख नाम लिस्ट से गायब थे।
केंद्र पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को आबादी बढ़ने की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि SIR प्रक्रिया से देश की आबादी 140 करोड़ से घटकर 50 करोड़ हो सकती है।
केजरीवाल की यह टिप्पणी दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (Voter List) सामने आने के बाद आई है, जिसमें पता चला कि 1,45,10,299 रजिस्टर्ड वोटरों में से 47,56,722 वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं थे। इस ड्राफ्ट लिस्ट में दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों के कुल 97,53,577 वोटर शामिल हैं।
यह प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई और 17 अगस्त को समाप्त हुई
SIR प्रक्रिया के तहत, जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया गया, दिल्ली के लगभग 67.18 प्रतिशत मतदाताओं के लिए जानकारी जुटाने वाले फ़ॉर्म (enumeration forms) प्राप्त किए गए और उन्हें डिजिटल रूप में दर्ज किया गया। यह प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई और 17 अगस्त को समाप्त हुई।
चुनाव आयोग ने बाकी बचे मतदाताओं को ASDDO कैटेगरी के तहत 'अनकलेक्टेबल' (जिनका डेटा इकट्ठा नहीं किया जा सका) माना है। इस कैटेगरी में वे मतदाता आते हैं जिन्हें अनुपस्थित, दूसरी जगह चले गए, मृत, डुप्लिकेट या अन्य कैटेगरी में मार्क किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR (स्पेशल समरी रिविजन) किया गया है, उनमें दिल्ली में नाम हटाने का प्रतिशत सबसे ज्यादा रहा है; कुल संख्या के हिसाब से भी, 47 लाख से ज्यादा नाम हटाना सबसे ज्यादा मामलों में से एक है।
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'फ्लोटिंग आबादी' (आने-जाने वाली आबादी) को जिम्मेदार ठहराया
एक चुनाव अधिकारी ने नाम हटाने की इतनी बड़ी संख्या के लिए कुछ हद तक दिल्ली की बड़ी 'फ्लोटिंग आबादी' (आने-जाने वाली आबादी) को जिम्मेदार ठहराया। इसकी वजह से वेरिफिकेशन के दौरान काफ़ी संख्या में वोटरों को 'शिफ्टेड' (दूसरी जगह चले गए) या 'अनअवेलेबल' (मौजूद नहीं) के तौर पर मार्क किया गया होगा।
दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन का स्तर अलग-अलग रहा
दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटाइज़ेशन का स्तर अलग-अलग रहा। रोहिणी में यह दर सबसे ज़्यादा 83.43 प्रतिशत थी, जबकि तुगलकाबाद में सबसे कम 52.15 प्रतिशत थी। जिन वोटरों के एन्यूमरेशन फ़ॉर्म इस प्रक्रिया के दौरान नहीं मिल पाए थे, वे अब भी वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवा सकते हैं। वे 30 सितंबर तक ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ फ़ॉर्म 6 भरकर अपना दावा पेश कर सकते हैं। दावों और आपत्तियों की जांच की जाएगी और नोटिस व निपटान की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक जारी रहेगी। चुनाव आयोग के संशोधित शेड्यूल के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
