पटना

बिहार में यूपी वालों को लगाया चूना, 400 बेरोजगारों को बनाया बंधक; इस तरकीब से ठगे रुपये

बिहार के मोतिहारी में 400 युवकों को नौकरी के नाम बुलाकर बंधक बनाने के मामले में पांच शातिरों को गिरफ्तार किया गया है। यहां पड़ोसी देश नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से आए 400 से अधिक युवकों को बंधक बनाकर रखा गया था।

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(सांकेतिक फोटो)

मोतिहारी : बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल इलाके से पुलिस ने शनिवार को एक बड़े फर्जी नौकरी रैकेट का भंडाफोड़ किया। यहां पड़ोसी देश नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से आए 400 से अधिक युवकों को बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस ने छापेमारी कर इन युवकों को मुक्त कराया। मुक्त कराए गए युवकों में कई नाबालिग भी हैं। पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात ने आईएएनएस को बताया कि कई दिन से पुलिस को यह सूचना मिल रही थी कि रक्सौल थाना क्षेत्र में नेपाल सहित उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से लड़कों को नौकरी देने के नाम पर बुलाया जा रहा है और उसके बाद उन्हें बंधक बनाकर रखा जा रहा है। इसके बाद इन युवकों के परिजनों से फिर पैसे वसूल किए जा रहे हैं।

इसी सूचना के सत्यापन के बाद शनिवार को रक्सौल अनुमंडल पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) द्वारा संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया गया, जिसमें 400 से अधिक युवकों को मुक्त कराया गया। इनमें से कई नाबालिग हैं।

इस मामले की सूचना श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी को भी दे दी गई है। जिन बच्चों को मुक्त कराया गया है, उनके लिखित आवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक समूह द्वारा नौकरी का झांसा देकर लोगों को बुलाया जाता था। ग्रुप के संचालक सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले की विस्तृत जांच और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है। पीड़ितों का ब्रेनवॉश किया जा रहा था और उनके अभिभावकों को ठगा जा रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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