पटना

Patna में सोते बच्चों को किया था आग के हवाले, हत्यारोपी गिरफ्तार

बिहार की राजधानी पटना में 31 जुलाई को चुनाव आयोग में तैनात कर्मचारी के दो बच्चों की आग लगाकर हत्या के मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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पटना में बच्चों को जलाकर मारने के मामले में खुलासा

पटना : शहर के जानीपुर स्थित नगवां गांव में गुरुवार को दो किशोरों की आग लगाकर जलाने के मामले में पुलिस को बड़े सुराग मिले थे। परिजनों ने दोनों बच्चों की हत्या की आशंका जताई थी, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए 8 टीमें बनाई गई थी। एसएसपी पटना ke कहना है कि पूछताछ के बाद पता चलेगा कि बच्चों की हत्या क्यों की गई? इसमें और भी लोग शामिल है उनके बारे में भी पूछताछ की जा रही है और छापेमारी चल रही है। जिन लोगों ने घटना को अंजाम दिया है वो पीड़ितों के जानने वाले हैं

दरअसल, 31 जुलाई की सुबह शहर के जानीपुर स्थित एक मकान में सो रहे के नाम अंजली (10) और अंश (15) को आग के हवाले कर दिया गया। परिजनों का आरोप था कि किसी ने घर में घुसकर उनके बच्चे की आग लगाकर हत्या कर दी, दोनों पलंग पर ही जलकर खत्म हो गए।

बिस्तर में ही जल गए बच्चे

सीटी एसपी वेस्ट भानु प्रताप की देखरेख में जांच पड़ताल जारी है। कल उनका कहना था कि पुलिस हत्या से लेकर हर पहलू पर जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि जिस बिस्तर पर दोनों के शव मिले, वह भी जला हुआ था। पुलिस मृतकों के माता-पिता के बयान भी दर्ज किए थे। बच्चों की मां शोभा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)-पटना में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करती है और पिता ललन कुमार गुप्ता चुनाव आयोग में कार्यरत हैं।

पिता ने बताया कि बच्चे स्कूल से वापस आकर घर में सो रहे थे। इसी दौरान किसी दबंग ने घर में घुसकर दोनों बच्चों को आग के हवाले कर दिया। जब हम पहुंचे तो दोनों बच्चे जल रहे थे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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