Delhi Protest: दिल्ली पुलिस ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेश (UGC) 2026 और जातिगत व्यवस्था के खिलाफ 23 अगस्त को शाह ऑडिटोरियम में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उन दावों को "झूठा और भ्रामक" करार दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि इस प्रदर्शन के लिए अनुमति दी गई है। पुलिस के अनुसार, उत्तरी जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 पहले से लागू है, जिसके चलते किसी भी तरह के विरोध मार्च, जुलूस, प्रदर्शन या 5 से अधिक व्यक्तियों के एक साथ जमा होने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
फर्जी दावों पर पुलिस की चेतावनी
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स और आम नागरिकों को बिना सत्यापन वाले भ्रामक वीडियो या संदेश शेयर न करने की हिदायत दी है। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि शाह ऑडिटोरियम या आसपास किसी भी समूह को प्रदर्शन की मंजूरी नहीं दी गई है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद उपजा विवाद
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब शुक्रवार को जंतर-मंतर पर 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' (RHA) के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने जुटकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा और रोजगार में जाति आधारित आरक्षण के बजाय आर्थिक स्तर (Income Level) के आधार पर आरक्षण की मांग की। उन्होंने 'एक परिवार, एक आरक्षण' की नीति लागू करने और यूजीसी के 2026 जाति-समानता (Caste-Equity) निर्देशों को तुरंत वापस लेने की मांग की। जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को एहतियातन भारी संख्या में तैनात किया गया था। पुलिस ने कहा है कि 23 अगस्त को शाह ऑडिटोरियम में प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने का दावा गलत है और लोगों को ऐसे संदेशों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
