सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद आज दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू की गई। डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती हरीश राणा के जीवनरक्षक उपकरणों को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में उपचाराधीन हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट सिस्टम से जुड़े दो महत्वपूर्ण पाइप पहले चरण में हटा दिए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
चिकित्सकों की टीम कर रही लगातार निगरानी
अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी तरह चिकित्सकीय मानकों और कानूनी दिशा-निर्देशों के तहत सावधानीपूर्वक की जा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार मरीज की हालत पर नजर रखे हुए है। हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय जटिलता का सामना किया जा सके।
आगे की प्रक्रिया स्थिति पर करेगी निर्भर
बताया जा रहा है कि जीवनरक्षक उपकरणों का कुछ हिस्सा हटाए जाने के बाद अब आगे का निर्णय मरीज की शारीरिक प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य की स्थिति को देखकर लिया जाएगा। डॉक्टरों का मानना है कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को धीरे-धीरे पूरा किया जाता है और इसमें किसी तय समय सीमा का निर्धारण नहीं होता। इसलिए आगे की कार्रवाई पूरी तरह मेडिकल आकलन पर आधारित होगी।
पहली बार किसी व्यक्ति की निष्क्रिय इच्छा मृत्यु का आदेश
इससे पहले,हाल ही में हरीश राणा की माता-पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इच्छा मृत्यु का आदेश दिया था। 100 फीसदी दिव्यांगता के शिकार हो चुके बेटे के ठीक होने की उम्मीद छोड़ चुके हरीश के माता-पिता ने ही उसे इच्छा मृत्य देने की मांग की थी। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी CMO को एक पैनल बनाने को कहा है।2013 में हुआ था हरीश के साथ हादसा
एम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हरीश के ठीक होने की उम्मीद नहीं है। जस्टिस पारदीवाला ने कहा था कि यह बेहद दुखद रिपोर्ट है। यह हमारे लिए मुश्किल फैसला है। पर हम इस लड़के को यूं अपार दुःख में नहीं रख सकते। हम उस स्टेज में है जहां आज हमें आखिरी फैसला लेना होगा। चंडीगढ़ में रह कर पढ़ाई कर रहे हरीश 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं थी। उसके बाद से वह लगातार बिस्तर में अचेत हालत में है। लगातार बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर पर घाव बन गए हैं।
