दिल्ली : डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ CBI ने बड़ी कार्रवाई की है। ऑपरेशन चक्र-VI के तहत CBI ने देश के 20 राज्यों में एक साथ 89 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। CBI के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट के मामलों में साइबर अपराधी खुद को पुलिस या दूसरे सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल या फोन पर लगातार निगरानी में रखने का दावा करते हुए डिजिटल तरीके से ‘गिरफ्तार’ कर लेते हैं और जांच के नाम पर बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं।
CBI ने ऐसे कई मामलों की जांच अपने हाथ में ली है। इनमें से तीन बड़े मामलों में देशभर में यह कार्रवाई की गई। जांच के दौरान बैंक खातों, ऑनलाइन अकाउंट और पैसों के लेन-देन की तकनीकी जानकारी खंगालने के बाद आरोपियों के ठिकानों की पहचान की गई।
तीन मामलों में करोड़ों की ठगी
CBI के मुताबिक, एक मामला BITS Pilani से जुड़ा है। इसमें पीड़ित को करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और पुलिस अधिकारी बनकर उससे करीब 7.67 करोड़ रुपये ठग लिए गए। दूसरे मामले में गुजरात के एक पीड़ित को भी करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। पुलिस अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने उससे करीब 19.24 करोड़ रुपये की ठगी की। तीसरा मामला कर्नाटक का है। इसमें पीड़ित को करीब एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया और उससे 15.45 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
बैंक खातों और डिजिटल डिवाइस से खुलेंगे राज
छापेमारी के दौरान CBI ने बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी, मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों समेत कई अहम सबूत बरामद किए हैं। इनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची, उसे किस तरह अलग-अलग खातों में भेजा गया और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग हैं।
तीन आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान CBI ने अकाश, राजा कर्मकार और ज्योति रानी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि हरियाणा निवासी अकाश के बैंक खाते में ठगी की रकम में से करीब 1.95 करोड़ रुपये आए थे। CBI के मुताबिक, उसने खुद खाता खुलवाया और रकम आने के बाद उसी दिन दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी। वहीं, कोलकाता के राजा कर्मकार की फर्म के खाते में करीब 1.5 करोड़ रुपये की ठगी की रकम पहुंची थी।
तीसरी आरोपी ज्योति रानी के खाते में भी ठगी की रकम का एक हिस्सा पहुंचा था। आरोप है कि उसने रकम का कुछ हिस्सा कैश में निकाल लिया और बाकी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी। CBI के मुताबिक, इससे ठगी की रकम का ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई। सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी है। एजेंसी का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले संगठित साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
