नोएडा

Bageshwar Dham: धीरेंद्र शास्त्री की कथा में मची भगदड़, कई लोग घायल; पुलिस ने संभाली स्थिति

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 12, 2023, 10:08 PM IST

Bageshwar Dham: धीरेंद्र शास्त्री की कथा में उम्मीद से ज्यादा लोग पहुंच गए थे। लोगों को रोका भी गया, लेकिन वे बैरीकेटिंग तोड़ के आगे बढ़ गए। भगदड़ मचने के बाद कई लोग मैदान के बाहर नंगे तारों की चपेट में भी आ गए, जिससे वे घायल हो गए।

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Bageshwar-Dham- Dhirendra Shastri

Bageshwar Dham: ग्रेटर नोएडा के जैतपुर में चल रहे बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा के दौरान भगदड़ मचने की खबर है। बताया रहा है कि बाबा बागेश्वर के दरबार में लाखों लोग पहुंच गए, जिससे भगदड़ मच। इस दौरान कई श्रद्धालुओं के घायल होने की भी सूचना है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक, भगदड़ के बाद धीरेंद्र शास्त्री के दिव्य दरबार को भी रोकना पड़ा है।

आयोजकों का कहना है कि कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद थी, जिसके लिए व्यवस्था भी की गई थी। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद से भी ज्यादा हो गई, जिस कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई।

भीड़ के कारण मची अफरातफरी

जानकारी के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री की कथा में उम्मीद से ज्यादा लोग पहुंच गए थे। लोगों को रोका भी गया, लेकिन वे बैरीकेटिंग तोड़ के आगे बढ़ गए। बड़ी संख्या में भीड़ पहुंचने के कारण अध्यधिक गर्मी हो गई, जिससे महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे परेशान हो गए और कथास्थल पर अफरातरफरी का माहौल बन गया।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

जानकारी के मुताबिक, भगदड़ मचने के बाद कई लोग मैदान के बाहर नंगे तारों की चपेट में भी आ गए, जिससे वे घायल हो गए। वहीं कई लोग ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहोश भी हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 10 लोगों के घायल होने की सूचना है। कथा स्थल पर भगदड़ की सूचना के बाद मौके पर पुलिस पहुंची और स्थिति को संभाला।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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