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मालदा जज घेराव कांड: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर NIA ने दर्ज कीं 12 FIR, बंगाल में बढ़ी सियासी हलचल

मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और हिंसा करने के मामले में NIA ने 12 FIR फिर दर्ज की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे प्रशासन की विफलता बताते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी है।

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NIA ने दर्ज कीं 12 FIR (सांकेतिक चित्र)

Photo : Times Now Digital

Malda Case: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी और हिंसा के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मोर्चा संभाल लिया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश के बाद केंद्रीय एजेंसी ने इस घटना से संबंधित 12 FIR दर्ज की हैं। यह मामला चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और न्यायपालिका की सुरक्षा से जुड़े एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार और NIA को कमान

मालदा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे न्यायाधीशों के घेराव को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन की 'गंभीर विफलता' करार दिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की साख गिर रही है और न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की यह एक सुनियोजित कोशिश थी।

9 घंटे तक बनाए रखा बंधक

कालियाचक इलाके में भीड़ ने तीन महिला न्यायाधीशों और एक पांच साल के बच्चे समेत सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान उन्हें न खाना दिया गया और न ही पानी। इतना ही नहीं, उनकी गाड़ियों पर ईंट-पत्थरों से हमला भी किया गया। ये न्यायाधीश मालदा में लगभग 60 लाख अपात्र मतदाताओं की शिकायतों के निपटारे जैसे संवेदनशील काम में तैनात थे।

कालियाचक और मोथाबाड़ी में NIA की एंट्री

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश मिलते ही एनआईए ने मालदा जिले के मोथाबाड़ी थाने की 7 और कालियाचक थाने की 5 एफआईआर को दोबारा दर्ज कर लिया है। एजेंसी की विशेष टीमें पहले ही मालदा पहुंच चुकी हैं और स्थानीय पुलिस से केस डायरी और सबूतों को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। पुलिस को आदेश दिया गया है कि इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए सभी 26 आरोपियों को तत्काल एनआईए के सुपुर्द किया जाए।

मास्टरमाइंडों की तलाश और चुनावी रंजिश

जांच के घेरे में मुख्य संदिग्ध मोफाकरुल इस्लाम और मौलाना मोहम्मद शाहजहां अली कादरी हैं, जो पहले से ही हिरासत में हैं। एजेंसी अब इस बात की तहकीकात करेगी कि क्या इस हमले के पीछे कोई गहरा राजनीतिक षड्यंत्र था ताकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य को रोका जा सके। गौरतलब है कि इस प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल के साथ-साथ ओडिशा और झारखंड के भी लगभग 700 न्यायाधीशों को तैनात किया गया है, जिनकी सुरक्षा अब एक बड़ी चिंता बन गई है।

Pooja Mehta
पूजा मेहताauthor

पूजा मेहता एक वरिष्ठ टेलीविज़न पत्रकार हैं, जिन्हें रिपोर्टिंग का लगभग 15 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने राजनीति, आतंकवाद, आंतरिक संघर्ष, रक्षा, पर्यावरण और अपराध पर व्यापक रिपोर्टिंग की है, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों पर गहरा फोकस रखते हुए। संघर्षग्रस्त इलाकों से उनकी ज़मीनी रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों की गहन समझ उन्हें पैनी दृष्टि और विश्वसनीय विश्लेषण के लिए अलग पहचान दिलाती है। वह प्रमाणित Defence Correspondent हैं और अमेरिकी विदेश विभाग के प्रतिष्ठित International Visitor Leadership Program (IVLP) की एलुमनी भी हैं, जिससे विदेशी नीति, सुरक्षा और सामरिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई है।

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