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374 किमी लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़ेंगे 3 शहर, एक का भगवान राम से गहरा नाता

नासिक, सोलापुर और अक्कलकोट को जोड़ने वाला 374 किमी लंबे 6 लेन हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह सूरत-चेन्नई हाई-स्पीड कॉरिडोर का अहम हिस्सा होगा और देश की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा। इससे सेंट्रल इंडिया के कई शहर जुड़ेंगे।

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नासिक और सोलापुर को और करीब लाएगा ये प्रस्तावित ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट

रामायण के अनुसार भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान लंबा काफी समय पंचवटी में गुजारा था। आज वही पंचवटी नासिक कहलाता है। नासिक का भगवान राम से गहरा नाता है। इसी तरह सोलापुर अपने टेक्सटाइल उद्योग के लिए मशहूर है, जबकि अक्कलकोट का श्री स्वामी समर्थ से आध्यात्मिक नाता है। महाराष्ट्र के इन तीनों शहरों को जोड़ने के लिए एक हाईस्पीड कॉरिडोर बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। चलिए जानते हैं इस प्रोजेक्ट के बारे में -

6 लेन के कॉरिडोर को कैबिनेट की मंजूरी

केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र में 374 किमी लंबा कॉरिडोर को बनाने की मंजूरी दे दी है। 6 लेन का यह हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर नासिक से शुरू होकर सोलापुर और अक्कलकोट को जोड़ेगा। यह एक कॉरिडोर देश के हाई-स्पीड नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में मील का पत्थर साबित होगा।

सूरत-चेन्नई हाईस्पीड कॉरिडोर का हिस्सा

केंद्र सरकार ने सूरत-चेन्नई हाई-स्पीड कॉरिडोर के सबसे बड़े और अहम हिस्से के रूप में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। केंद्र सरकार इस 374 किमी लंबे कॉरिडोर पर 19142 करोड़ रुपये के निवेश कर रही है। सूरत-चेन्नई हाई-स्पीड कॉरिडोर, पश्चिमी भारत और दक्षिण भारत के बीच बेहतरीन कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा।

31 घंटे की दूरी 17 घंटे में सिमटेगी

नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट कॉरिडोर को बिल्ड, ऑपरेट, ट्रांस्फर मोड पर बनाया जाएगा। इस कॉरिडोर के बन जाने से नासिक और सोलापुर के बीच की दूरी 14 फीसद तक कम हो जाएगी। इस पूरे कॉरिडोर के बन जाने के बाद सूरत और चेन्नई के बीच की दूरी 31 घंटे से कम होकर 17 घंटे की ररह जाएगी। सूरत से चेन्नई तक का यह पूरा कॉरिडोर आम लोगों के साथ ही सामान की आवाजाही भी तेज होगी।

सेंट्रल इंडिया के कई शहरों को मिलेगी कनेक्टिविटी

इस सड़क परियोजना का फायदा दक्षिण और मध्य भारत के कई शहरों को होगा। नासिक और सोलापुर के अलावा आंध्र प्रदेश में करनूल भी इससे जुड़ेगा। यही नहीं देश के सबसे लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी इस प्रोजेक्ट को कनेक्टिविटी मिलेगी। वधावन पोर्ट इंटरचेंज के जरिए यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। नासिक में यह आगरा-मुंबई कॉरिडोर और समृद्धि महामार्ग से जुड़ेगा जो मुंबई को नागपुर और नासिक से जोड़ता है।

चार लेन के कॉरिडोर पर चल रहा काम

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के प्रेस स्टेटमेंट के अनुसार प्रस्तावित कॉरिडोर के जरिए पश्चिमी तट और पूर्वी तट आपस में जुड़ जाएंगे। चेन्नई से कनेक्टिविटी के लिए थिरुवल्लूर, रेनिगुंटा, कडप्पा और करनूल होते हुए 700 किमी लंबे चार लेन का कॉरिडोर का काम पहले ही जारी है।

100 KM की स्पीड से दौड़ेंगी गाड़ियां

6 लेन का नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट कॉरिडोर एक्सेस कंट्रोल्ड टोल रोड होगा। इस ग्रीनफील्ड हाईवे पर वाहनों की औसत स्पीड 60 किमी प्रति घंटा होगी, जबकि इसे 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक के लिए तैयार किया जाएगा।

FAQs

नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट हाईस्पीड कॉरिडोर क्या है?

यह 374 किमी लंबा, 6 लेन का ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर है, जो महाराष्ट्र के नासिक, सोलापुर और अक्कलकोट को जोड़ेगा।

नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट हाईस्पीड कॉरिडोर पर कितना खर्च आएगा?

नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट हाईस्पीड कॉरिडोर किस बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है?

सूरत-चेन्नई हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रा समय में कितना बदलाव आएगा?

इस कॉरिडोर पर गाड़ियों की अधिकतम स्पीड कितनी होगी?

सूरत-चेन्नई हाई-स्पीड कॉरिडोर किन अन्य प्रमुख परियोजनाओं से जुड़ेगा?

सूरत-चेन्नई हाई-स्पीड कॉरिडोर से किन राज्यों और शहरों को लाभ होगा?

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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