कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। टीएमसी की राज्यसभा सांसद और जानी-मानी अभिनेत्री कोएल मल्लिक ने गुरुवार को राज्यसभा से अपना इस्तीफा सौंप दिया। कोएल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। सभापति सीपी राधाकृष्णन को सौंपे गए अपने त्यागपत्र में उन्होंने इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया है। अब उनके इस्तीफे के बाद एक सीट खाली सीट के लिए 24 जुलाई को उपचुनाव होने हैं। उसके लिए अभी नामों का खुलासा नहीं किया गया है। इनमें से कई चेहरों को लेकर कयासबाजी चल रही है, जिसमें से कुलदीप मैती भी शामिल हैं। खाली हुई सीटों पर चुनाव आयोग 24 जुलाई को उपचुनाव कराएगा। वोटों की गिनती 24 जुलाई 2026 को ही पूर्ण कर ली जाएगी।
टीएमसी के लिए बड़ा झटका
पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। कोएल मल्लिक का इस्तीफा ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके जाने से राज्यसभा में पार्टी की सदस्य संख्या घटकर नौ रह गई है। मल्लिक टीएमसी की ओर से चुनी गई उन सेलिब्रिटी सांसदों में से थीं, जिन्हें फरवरी में ही नामांकित किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि सांसद बनने के बावजूद उन्होंने सदन की एक भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया था। इस्तीफा देने के तुरंत बाद, उन्होंने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें और तेज हो गई हैं।
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कुलदीप मैती हो सकते हैं राज्यसभा उम्मीदवार
कोएल मल्लिक के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई इस सीट पर भाजपा की नजरें टिकी हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस सीट के लिए किसी नए और मजबूत चेहरे पर दांव लगा सकती है। इस दौड़ में समाजसेवी कुलदीप मैती का नाम भी है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अभी तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन जल्द ही प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
मीडिया में चल रहीं खबरों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की राजनीति में उठापटक के बीच वीएफएस कैपिटल के एमडी और सीईओ कुलदीप माइती का नाम अचानक सुर्खियों में है। सूत्रों के मुताबिक उनके भाजपा में शामिल होने के लंबे समय से संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने पर भी विचार कर सकती है।
टीएमसी का बिखराव और भविष्य पर सवाल
यह घटनाक्रम टीएमसी में जारी उस बड़े बिखराव का हिस्सा है, जो बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद से अनवरत जारी है। टीएमसी के शीर्ष नेताओं और पूर्व वफादारों का साथ छोड़कर जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे 'कालीघाट तृणमूल' पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। भाजपा बंगाल अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि टीएमसी अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और उसका जनता के बीच कोई राजनीतिक आधार नहीं बचा है। आने वाले कुछ दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं, क्योंकि राज्यसभा की सीटों पर उपचुनाव की बिसात बिछ चुकी है।
