मुंबई

Maharashtra में जीबीएस ने डराया, मरीजों की संख्या हुई 207; कोल्हापुर में सिंड्रोम से महिला की मौत होने का संदेह

GBS Cases Increased: महाराष्ट्र में जीबीएस का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के मरीजों की संख्या बढ़कर 207 हो गई है, वहीं कोल्हापुर में महिला की मौत जीबीएस से होने का संदेह है। अधिकारियों ने बताया है कि इस सिंड्रोम के पुष्ट मामलों की संख्या 180 हो गई है। आपको इस रिपोर्ट में ताजा अपडेट बताते हैं।

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GBS के मामलों पर आया अपडेट। (File photo)

Maharashtra News: महाराष्ट्र में जीबीएस के दो और मामले सामने आए हैं। दो और लोगों में ‘गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस)’ की पुष्टि होने के साथ ही यहां इस विकार के मामलों की कुल संख्या 207 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

जीबीएस के पुष्ट मामलों की संख्या हो गई 180

अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को दो नए मामले सामने आने के बाद पुष्ट मामलों की संख्या 180 हो गई है, जिनमें से 20 मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया हैं। हालांकि राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या आठ ही है, लेकिन कोल्हापुर में इस बीमारी से एक संदिग्ध मौत की खबर मिली है।

इससे पहले अधिकारियों ने बताया था कि मुंबई के एक अस्पताल में जीबीएस से 53 वर्षीय एक व्यक्ति की भी मौत हो गई, जो तंत्रिका विकार के कारण शहर में पहली मौत थी।

60 वर्षीय महिला की 13 फरवरी को मौत हो गई

जिले में स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि चांगिड तहसील निवासी 60 वर्षीय महिला की 13 फरवरी को मौत हो गई। अधिकारी ने बताया, ‘‘उनके आधे शरीर (निचले हिस्से) में पक्षाघात (लकवा) हो गया था और उन्हें पहले चांगिड के एक अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था और फिर कर्नाटक ले जाया गया। उन्हें 11 फरवरी को कोल्हापुर के एक अस्पताल में वापस लाया गया, जहां दो दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई।’’

जीबीएस तंत्रिका संबंधी एक दुर्लभ विकार है, जिसमें व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और शरीर के हिस्से अचानक सुन्न पड़ जाते हैं। मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और कुछ निगलने या सांस लेने में भी दिक्कत होती है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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