मुंबई

महाराष्ट्र हनी ट्रैप कांड: 72 IAS और पूर्व मंत्री बने शिकार, कांग्रेस नेता ने दिखाई पेन ड्राइव; जानें क्या है माजरा

महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता नाना पटोले ने विधानसभा में एक पेन ड्राइव दिखाते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार के 72 अधिकारी और कई पूर्व मंत्री हनी ट्रैप के जाल में फंसे हुए हैं। सरकार ने इस मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

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सांकेतिक फोटो (फोटो-Istock)

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों सियासी भूचाल सा आ गया है। यहां वरिष्ठ कांग्रेस नेता नाना पटोले ने विधानसभा में एक पेन ड्राइव का जिक्र किया, जिसमें कथित हनी ट्रैप कांड से जुड़े सबूत होने का दावा किया गया। पटोले ने कहा कि इस मामले में 72 वरिष्ठ IAS अधिकारियों और कई पूर्व मंत्रियों का नाम शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास सबूत हैं और सरकार को इस पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। यह हनी ट्रैप रैकेट नासिक, ठाणे और मुंबई के तीन बड़े शहरों में सक्रिय बताया जा रहा है।

मंत्रियों को किया गया ब्लैकमेल

न्यूज 18 की खबर के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आरोप है कि एक महिला ने मंत्रियों और अधिकारियों को फंसाकर उन्हें ब्लैकमेल किया और गोपनीय जानकारी हासिल की। यह महिला नासिक की निवासी है और एक पूर्व राजनीतिक पदाधिकारी भी रह चुकी है। पटोले ने विधानसभा में पेन ड्राइव दिखाते हुए कहा कि यदि सरकार चाहे, तो वह इसे सौंप सकते हैं। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष में हंगामा मच गया।

सूत्रों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों से इस मामले को दबाने के लिए बातचीत चल रही है। सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का आश्वासन दिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यदि कोई अधिकारी या पूर्व मंत्री दोषी पाया गया, तो कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, ठाणे क्राइम ब्रांच को तीन शिकायतें मिली हैं, जिनकी गोपनीय जांच चल रही है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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