Versova–Bandra Sea Link : महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने बुधवार को बड़ा फैसला लिया। शिंदे सरकार ने वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का नाम बदलकर वीर सावरकर सेतु कर दिया। इसी तरह मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक अब पूर्व प्रधानमंत्री एवं दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जाना जाएगा। जाहिर है कि बांद्रा सा लिंक का नाम वीर सावरकर के नाम पर करने पर सियासत गरमा सकती है। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर विपक्ष शायद हो-हल्ला नहीं मचाए लेकिन सावरकर के नाम पर कांग्रेस शिंदे सरकार को निशाने पर ले सकती है।
नामों पर राजनीति न हो-मुंगनटिवार
बता दें कि सीएम शिंदे ने कहा था कि वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का नाम सावरकर के नाम पर रखा जाएगा। उनकी इस घोषणा के करीब एक महीने बाद नाम बदला गया है। राज्य सरकार के इस फैसले की जानकारी भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री सुधीर मुंगनटिवार ने दी। भाजपा नेता ने कहा कि इन नामों पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये नामकरण देश की दो विभूतियों के नाम पर हुए हैं।
सावरकर को हिंदू आइकन के रूप में देखती है BJP
विनायक दामोदर सावरकर उर्फ वीर सावरकर एक हिंदू राष्ट्रवादी नेता थे। भारतीय जनता पार्टी सावरकर को अपने हिंदू आइकन के रूप में देखती है। जबकि अटल बिहारी वाजपेयी देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भाजपा के दिग्गज नेताओं में से एक हैं।
सावरकर को सेल्युलर जेल भेजा
अंग्रेज सरकार ने 1910 में सरकार को गिरफ्तार किया और उन्हें 50 साल की कैद की सजा दी। काला पानी की सजा देते हुए उन्हें अंडमान निकोबार द्वीप स्थित सेल्युलर जेल भेजा। जेल में सावरकर ने 'एसेंसियल्स ऑफ हिंदुत्व' नाम से किताब भी लिखी। वाजपेयी देश के तीन बार प्रधानमंत्री रहे।
