Southwest Monsoon 2026 : देशभर में गर्म और लू के बीच पिछले कई दिनों से बादलों की आवाजाही से मौसम का मिजाज ऊपर नीचे हो रहा है, जिससे लोगों चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, उत्तर भारत में अभी तेज बारिश का इंतजार है। आईएमडी ने मंगलवार को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) ने करीब दो सप्ताह तक धीमी चाल से आगे बढ़ने के बाद एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मानसून अब मध्य भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि अगले 48 घंटों में महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड तथा बिहार के कई और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां बन रही हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून अगर समय से बारिश करता है तो किसान खरीफ की फसलों की बुआई कर सकेंगे और उत्तर-मध्य भारत में भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।
पहाड़ों पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर
मौसम विभाग ने बताया कि मानसून की सक्रियता के बावजूद देश के कई हिस्सों में मौसम का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। फिलहाल, पहाड़ों पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश और हवाओं के साथ ओले गिरने की घटनाएं हो रही हैं। उधर, जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले के कंडी क्षेत्र में रविवार की रात बादल फटने से अचानक बाढ़ और कई इलाके जलमग्न हो गए। वहीं श्रीनगर समेत घाटी के कई हिस्सों में तेज बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया। वहीं, हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रा और पांगी की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी से मौसम काफी सर्द बना हुआ है, जबकि कुल्लू, चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों में बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई। इससे मौसम में ठंडक घुल गई और लोगों को सुहावने मौसम का एहसास हुआ। इधर, उत्तराखंड के चमोली, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में विक्षोभ के असर से बीच-बीच में हल्की बारिश रिकॉर्ड की जा रही है। मौसम विज्ञान विभाग ने जून के आखिरी सप्ताह तक पहाड़ों पर मॉनसून के पहुंचने के संकेत दिए हैं।
उधर, पूर्वोत्तर के हिमालयी राज्यों, पूर्वी और दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में मॉनसून की सक्रियता के कारण भारी बारिश हो रही है। हालांकि, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अभी भी भीषण गर्मी और लू जैसे हालात बने हुए हैं। आईएमडी की मानें तो सोमवार को देश का सबसे अधिक तापमान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 43.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि महाराष्ट्र के वर्धा में पारा 43 डिग्री रहा।
मॉनसून टाइमलाइन
आईएमडी के मुताबिक, बीते 24 घंटों के दौरान मेघालय और पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा हुई। ओडिशा, बिहार, मध्य महाराष्ट्र, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और त्रिपुरा में भी कई स्थानों पर भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं, दूसरी ओर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और दक्षिण भारत के कई राज्यों में 40 से 81 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान चला। अगले कुछ घंटों में मौसम के बदलने की संभावना बनी हुई है।
अगले 48 घंटों के दौरान मुंबई सहित महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों में मानसून एंट्री ले सकता है। मॉनसून के तेलंगाना और ओडिशा के बाकी हिस्सों, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
जानकारी के मुताबिक, झारखंड में खराब मौसम जानलेवा साबित हुआ है। सोमवार को बिजली गिरने से 11 लोगों की मौत हो गई। सबसे अधिक चार मौतें खूंटी जिले में दर्ज की गईं।
राजस्थान में आंधी-तूफान
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि पश्चिमी राजस्थान में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर हवा की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी तेज आंधी चलने की संभावना जताई गई है। लिहाजा आईएमडी ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की बढ़ती सक्रियता आने वाले दिनों में देश के बड़े हिस्से में राहत लेकर आएगी, लेकिन इसके साथ ही भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने जैसी घटनाओं को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी बनी रहेगी।
