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दीनदयाल के 'अंत्योदय' का जिक्र, भागवत बोले- सबके कल्याण से होगा विकास; RSS चीफ ने बताया विकास का मॉडल

भागवत ने कहा कि देश सुखी हो, इसके लिए समाज के अंतिम व्यक्ति का सुखी होना आवश्यक है, इसी को अंत्योदय कहा जाता है। उन्होंने कहा कि विकास का अर्थ यह नहीं हो सकता कि हर कोई एक ही स्तर पर पहुंच जाए, लेकिन असमानता को न्यूनतम किया जाना चाहिए।

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आरएसएस चीफ मोहन भागवत (फोटो-ANI)

यवतमाल : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि विकास के केंद्र में समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण होना चाहिए और विकास के उच्चतम एवं निम्नतम स्तरों के बीच का अंतर यथासंभव कम से कम होना चाहिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि ’अंत्योदय’ की अवधारणा का मूल अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि समाज का अंतिम व्यक्ति भी अधिक से अधिक सुखी रहे।

भागवत ने कहा कि देश सुखी हो, इसके लिए समाज के अंतिम व्यक्ति का सुखी होना आवश्यक है, इसी को अंत्योदय कहा जाता है। उन्होंने कहा कि विकास का अर्थ यह नहीं हो सकता कि हर कोई एक ही स्तर पर पहुंच जाए, लेकिन असमानता को न्यूनतम किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह सकते हैं कि इतने बड़े समाज में सभी विकास के एक स्तर पर नहीं हो सकते। यह ठीक भी है, लेकिन विकास के निम्नतम और उच्चतम स्तरों के बीच अंतर यथासंभव कम से कम होना चाहिए। जनसंघ के दिवंगत नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन का उल्लेख करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि वह विकास की उस परिभाषा को स्वीकार नहीं करते थे, जिसमें ’’अधिकतम लोगों का अधिकतम भला’’ स्वीकार किया जाता है।

सभी का कल्याण को ध्यान में रखकर हो विकास-भागवत

भागवत ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिससे सभी का कल्याण हो। भागवत ने महात्मा गांधी के सिद्धांत को याद दिलाते हुए कहा कि कोई भी फैसला लेते समय समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति का ध्यान रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब भी आप जीवन में कुछ सोचते हैं तो समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के बारे में सोचिए। खुद से पूछिए कि जो मैं कर रहा हूं, क्या उसका लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर पड़ेगा। अगर ऐसा है तो कीजिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो, वह काम करने की जरूरत नहीं है।

पीटीआई भाषा के हवाले से अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जिससे भोजन, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी हों, साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सबकी पहुच हो। उन्होंने लोगों के सम्मान के साथ रहने और दूसरों का सम्मान करने की बात भी कही।

भागवत ने कहा कि प्रकृति की कीमत पर विकास नहीं होना चाहिए और विकास तथा पर्यावरण दोनों का संरक्षण होना चाहिए। कृषि और किसानों के कल्याण पर बात करते हुए भागवत ने जैविक खेती, मिश्रित खेती, पशुपालन और बीज एवं खाद के मामले में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि किसान कर्ज के जाल में न फंसें और अधिक आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास को आगे बढ़ाना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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