Badrinath Missing Tamil Youth Reunion: भगवान बद्रीविशाल के पावन धाम से एक भावुक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने कानून की सख्ती के बीच मानवीय संवेदनाओं और पुलिस की सतर्कता की एक अनोखी मिसाल पेश की है। यह मामला तब शुरू हुआ जब बद्रीनाथ क्षेत्र में पुलिस द्वारा ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस को साधु के भेष में घूमता हुआ एक युवक संदिग्ध स्थिति में दिखाई दिया। जब उससे पूछताछ की गई, तो वह हिंदी भाषा का एक भी शब्द बोल पाने में असमर्थ पाया गया।
तमिल भाषा बोलने वाला युवक
शक और गहरा होने पर जब मामले की विस्तार से जांच की गई तो पता चला कि संबंधित युवक मूल रूप से तमिल भाषा बोलने वाला है। इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती भाषा की समस्या बनकर सामने आई, लेकिन तकनीक ने इस बाधा को भी दूर कर दिया। आरक्षी चंदन सिंह नगरकोटी ने गूगल ट्रांसलेटर की मदद से युवक से बातचीत की और प्रारंभिक जानकारी जुटाई। लगातार प्रयासों के बाद यह पता चला कि युवक तमिलनाडु के मदुरै जिले के असिनपट्टी थाना क्षेत्र का रहने वाला है। इसके बाद आरक्षी चंदन सिंह नगरकोटी ने प्रयास जारी रखते हुए असिनपट्टी पुलिस स्टेशन में तैनात हेड कांस्टेबल सेंथिल कुमार से संपर्क स्थापित किया और पूरी जानकारी साझा की।
रिकॉर्ड्स की जांच करने पर क्या पता चला?
वहां से मिली जानकारी ने सभी को हैरान कर दिया। रिकॉर्ड्स की जांच करने पर पता चला कि युवक का नाम सतीश है, जो मार्च 2026 से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता था। उसके परिवार ने पहले ही उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई हुई थी। जैसे ही तमिलनाडु में सतीश के परिजनों को यह सूचना मिली कि वह बद्रीनाथ धाम में सुरक्षित है, उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। बिना समय गंवाए परिजन तुरंत हवाई मार्ग से देहरादून पहुंचे और फिर वहां से कठिन पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए सीधे कार द्वारा बद्रीनाथ धाम पहुंच गए।
हर व्यक्ति हुआ भावुक
बद्रीनाथ कोतवाली में महीनों बाद जब माता-पिता और बेटे का आमना-सामना हुआ, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। सतीश अपने परिजनों को देखते ही खुद को संभाल नहीं सका और उनसे लिपटकर रोने लगा। लंबे समय से जमा हुआ दर्द और भावनाएं आंसुओं के रूप में बाहर आ गईं। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद पुलिस ने सतीश को उसके परिवार के सौंप दिया। इस दौरान भावुक परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस का आभार जताते हुए हाथ जोड़कर उनका धन्यवाद किया और कहा हमारा तो साक्षात भगवान नारायण से साक्षात्कार हो गया है। बद्रीनाथ पुलिस ने हमें हमारा खोया हुआ संसार लौटा दिया।।
इस पूरे रेस्क्यू अभियान और परिवार के पुनर्मिलन ने देश के दो छोर उत्तराखंड और तमिलनाडु को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। इस ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि आरक्षी चंदन नगरकोटी लगातार सतीश के परिजनों के संपर्क में बने रहे। तमिलनाडु से उत्तराखंड तक की इस लंबी और कठिन यात्रा के दौरान परेशान परिजनों को वे लगातार मार्गदर्शन देते रहे और हर कदम पर उन्हें हिम्मत और भरोसा दिलाते रहे।
