दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके से सामने आई दिल दहला देने वाली वारदात ने एक बार फिर साल 2012 के 'निर्भया' कांड की घावों को हरा कर दिया है। काम से घर लौट रही एक 30 वर्षीय महिला के साथ चलती बस में सामूहिक बलात्कार की इस घटना ने राजधानी की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समय पूछने पर बस में खींच लिया
पुलिस सूत्रों और पीड़िता के बयान के अनुसार, यह खौफनाक घटना 11 मई की रात उस समय हुई जब तीन बच्चों की मां और विवाहित महिला मंगोलपुरी की एक फैक्ट्री से काम खत्म कर घर लौट रही थी। सरस्वती विहार के बी-ब्लॉक बस स्टैंड के पास जब उसने एक निजी स्लीपर बस के दरवाजे पर खड़े व्यक्ति से समय पूछा, तो आरोपी ने उसे जबरन बस के अंदर खींच लिया। इसके बाद चालक और परिचालक ने चलती बस में महिला के साथ बारी-बारी से सामूहिक बलात्कार किया。 बताया जा रहा है कि बस करीब दो घंटे तक नांगलोई और रानी बाग जैसे इलाकों में घूमती रही।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
बाहरी दिल्ली के डीसीपी विक्रम सिंह के अनुसार, रानी बाग थाने में सूचना मिलते ही पीड़िता का बयान दर्ज कर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। महिला के बयान के आधार पर 12 मई को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) (बलात्कार), 70(1) (सामूहिक बलात्कार) और 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और वारदात में इस्तेमाल बस को जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के जरिए पीड़िता के बयान की पुष्टि कर रही है।
राजनीतिक घमासान: "निर्भया की पुनरावृत्ति"
इस घटना ने दिल्ली की सियासत में उबाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को कटघरे में खड़ा किया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे समाज पर कलंक बताते हुए कहा कि हमने निर्भया कांड से कुछ नहीं सीखा। वहीं 'आप' नेता सौरभ भारद्वाज ने इस घटना को 'बेहद शर्मनाक' बताया और आरोप लगाया कि बस दो घंटे तक सड़कों पर घूमती रही, लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
कांग्रेस भी इस मामले को लेकर हमलावर रही है, पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 'डबल इंजन' सरकार पर निशाना साधते हुए महिलाओं की सुरक्षा में नाकामी का आरोप लगाया।
गंभीर सवाल: क्या जानकारी छिपाने की कोशिश हुई?
विपक्ष ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि इस घटना की जानकारी सार्वजनिक करने में देरी क्यों हुई? क्या पुलिस मामले को दबाना चाहती थी या आरोपियों की गिरफ्तारी का इंतजार कर रही थी? यह भी सवाल उठाया गया है कि रानी बाग जैसे व्यस्त इलाके में एक बस दो घंटे तक घूमती रही और अपराध होता रहा, यह किस तरह की कानून-व्यवस्था है?
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