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Thane News: ठाणे के आश्रम स्कूल में हैवानियत, 22 नाबालिग छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप में रसोइया गिरफ्तार; पहले भी दर्ज था POCSO केस

Thane News: महाराष्ट्र के ठाणे स्थित शाहपुर के टेंबा आश्रम स्कूल में 22 नाबालिग छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप में रसोइए गणपत गवली को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पर पहले से पॉक्सो का केस दर्ज था।

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शाहपुर के टेंबा आश्रम स्कूल का मामला

Thane News: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में शाहपुर स्थित एक आश्रम स्कूल से बेहद दर्दनाक और शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के टेंबा आश्रम स्कूल में काम करने वाले 35 वर्षीय रसोइए को 22 नाबालिग छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न और अश्लील हरकतें करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान गणपत गवली के रूप में हुई है, जो पहले भी ऐसे ही एक संगीन जुर्म के आरोप में जेल जा चुका है।

10वीं की छात्रा की हिम्मत से बेनकाब हुआ आरोपी

मामला तब उजागर हुआ जब 26 अगस्त को टेंबा आश्रम स्कूल की कक्षा 10 की एक छात्रा ने हिम्मत दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित छात्रा ने आरोप लगाया कि गणपत गवली ने उसे अकेला पाकर घेर लिया और उसके साथ यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। इस घटना की जानकारी सामने आते ही जब पुलिस और प्रशासन ने जांच शुरू की, तो 21 अन्य नाबालिग छात्राएं भी डर मिटाकर आगे आईं। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि रसोइया लंबे समय से उनके साथ भी अनुचित व्यवहार और छेड़छाड़ कर रहा था।

पुराना अपराधी है आरोपी

जांच में पुलिस के सामने आरोपी गवली के काले अतीत का भी खुलासा हुआ है। आरोपी के खिलाफ साल 2024 में एक अन्य आश्रम स्कूल में नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज हुआ था। उस केस में अदालत से जमानत पर छूटने के बाद उसने टेंबा आश्रम स्कूल में रसोइए के सहायक के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP) की अधिकारी तेजस्विनी आर. गलांडे के अनुसार, गवली पहले अघाई के एक आश्रम स्कूल में पदस्थ था और बार-बार इस तरह की घिनौनी वारदात को अंजाम देता आ रहा था। उसकी सेवानिवृत्ति में महज 10 महीने ही बचे थे।

प्रशासनिक लापरवाही पर खड़े हुए गंभीर सवाल

टेंबा आश्रम स्कूल में अपनी तैनाती से पहले आरोपी मुरबाड के मोरोशी आश्रम स्कूल में कार्यरत था। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर कानून के तहत दर्ज आपराधिक मामले के बावजूद उसे बच्चों के स्कूल में दोबारा नौकरी कैसे मिल गई? पुलिस अब इस बिंदु की गहन जांच कर रही है कि क्या भर्ती के समय संबंधित अधिकारियों को उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी थी और कैसे बिना पुलिस वेरिफिकेशन के उसे इतनी संवेदनशील जगह पर नियुक्त किया गया।

Rakesh Kamal Trivedi
राकेश त्रिवेदीauthor

20 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ टीवी पत्रकारिता में सक्रिय, वर्तमान में TIMES NOW नवभारत में न्यूज़ एडिटर। क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म में मजबूत पकड़ के साथ महाराष्ट्र की राजनीति और हाई-इम्पैक्ट राष्ट्रीय खबरों पर गहरी नज़र। डेटा-ड्रिवन रिसर्च, निर्भीक सवाल, ऑन-ग्राउंड एक्सपीरियंस और बेबाक विश्लेषण का संतुलित मिश्रण उनकी शैली की खासियत है।

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