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अंडा हुआ 40% महंगा, मक्के की कीमत से क्या है कनेक्शन, समझें पूरा गणित

Egg Price Hike: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए मक्के की मांग बढ़ने से मुर्गियों का दाना महंगा हो गया है। इसके चलते अंडों के साथ-साथ प्याज और तेल के दाम भी काफी बढ़ गए हैं।

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क्यों महंगा हुआ आपका का अंडा? जानिए पूरा गणित (तस्वीर-AI)

Egg Price Hike : अगर आपके घर में रोज सुबह अंडा खाने की आदत है, तो अब आपकी जेब पर थोड़ा ज्यादा बोझ पड़ने वाला है। देश में पिछले एक साल में अंडे के दाम बहुत तेजी से बढ़े हैं। बाजार में एक अंडा अब 8.50 से 9 रुपये का मिल रहा है। पोल्ट्री फार्म (जहां मुर्गियां पाली जाती हैं) में ही एक अंडे की कीमत 7 रुपये के आसपास पहुंच गई है। यानी अंडे के दाम 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। मुर्गियों को जो दाना खिलाया जाता है, उसमें 65 से 70 प्रतिशत मक्का होता है। देश में हर साल जितना मक्का उगता है, उसका एक बड़ा हिस्सा (करीबी 37 प्रतिशत) अब एथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्रियों में जाने लगा है। इस वजह से बाजार में मुर्गियों के लिए मक्का कम पड़ने लगा है। जब मक्का कम हुआ, तो उसके दाम भी बढ़ गए। तीन साल पहले जो मक्का 14,000 रुपये प्रति टन मिलता था, वह अब 26,500 रुपये प्रति टन का हो गया है। दाना महंगा होने के कारण पोल्ट्री फार्म मालिकों के लिए मुर्गियां पालना महंगा हो गया है, जिससे अंडे के दाम भी बढ़ गए हैं।

गर्मी और मौसम की मार

अंडे महंगे होने की सिर्फ एक वजह एथेनॉल ही नहीं है। इस बार पड़ी तेज गर्मी और खराब मौसम के कारण भी पोल्ट्री फार्म चलाने का खर्च बढ़ गया है। बहुत सी मुर्गियां गर्मी झेल नहीं पाईं। जानकारों का कहना है कि आने वाले ठंड के दिनों में अंडों की मांग और बढ़ेगी, जिससे ये और महंगे हो सकते हैं।

रसोई का बाकी सामान भी हुआ महंगा

सिर्फ अंडा ही नहीं, रसोई की कई और चीजें भी महंगी हो गई हैं। बाजार में प्याज 43 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। हालांकि, सरकार लोगों की मदद के लिए 35 रुपये किलो में सस्ता प्याज बेच रही है। त्योहारों के मौसम में तेल के दाम 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और यह 200 रुपये प्रति लीटर से ऊपर चला गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गुड़ के दाम 25 प्रतिशत बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर देश को प्रदूषण से बचाना चाहती है और बाहर के देशों से तेल खरीदने का खर्च घटाना चाहती है। यह एक अच्छी बात है, लेकिन मक्के की कमी और मौसम की मार के कारण फिलहाल आम लोगों के घर का बजट बिगड़ गया है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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