Lunar Eclipse: आज यानी मंगलवार 3 मार्च चंद्र ग्रहण लग रहा है। चंद्र ग्रहण का समय दोपहर 3.20 बजे से शाम 6.46 बजे तक है। ऐसे में आप भी सोच रहे होंगे कि आप इस खगोलीय घटना को कैसे देख पाएंगे। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो हम आपके लिए खुशखबरी लेकर आए हैं कि आप भी चंद्रग्रहण देख सकते हैं। जी हां आप चंद्रग्रहण देख पाएंगे, चलिए जानते हैं कैसे?
यह खगोलीय घटना इस समय देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इधर दिल्ली-एनसीआर में इस चंद्रग्रहण की दृश्यता को लेकर लोगों में खास उत्सुकता है। जैसा कि हमने बताया चंद्र ग्रहण का समय दोपहर 3.20 बजे से शाम 6.46 बजे तक है। जबकि दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार को सूर्यास्त का समय 6.21 बजे का है। यानी सूर्यास्त होने के बाद भी आपके पास चंद्र ग्रहण देखने के लिए लगभग 25 मिनट का समय होगा। अगर आप इस दौरान सही जगह पर हों तो आप भी चंद्र ग्रहण देख सकते हैं। इसके अलावा सूर्यास्त से पहले ही रोशनी कम होने लगती है, आसमान में लालिमा छाने लगती है और आम दिनों में चंद्रमा के दर्शन भी हो जाते हैं। ऐसे में चंद्र ग्रहण आप सूर्यास्त से पहले भी देख सकते हैं।
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ज्योतिष और धार्मिक मत अलग है, लेकिन खगोलविदों के अनुसार चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। आज 3 मार्च को लगने वाला यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में आंशिक रूप से दिखाई देगा।
दिल्ली-एनसीआर में चंद्रमा के उदय का समय महत्वपूर्ण रहेगा। यदि ग्रहण का अंतिम चरण चंद्रमा के उगने के बाद जारी रहता है, तो लोग इसे शाम के समय पूर्व दिशा में खुले आसमान में देख पाएंगे। वैसे बता दें कि आज दिल्ली-एनसीआर में चंद्रोदय का समय भी 6.22 बजे है। यानी आपके पास चंद्र ग्रहण देखने के लिए करीब 24 मिनट का समय होगा। ऊंची इमारतों और प्रदूषण के कारण दृश्यता कुछ हद तक प्रभावित हो सकती है, इसलिए खुले मैदान या छत से आप इस खगोलीय घटना के गवाह बन सकते हैं।
अच्छी बात ये है कि चंद्रग्रहण देखने के लिए आपको किसी तरह के विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती, क्योंकि यह आंखों के लिए हानिकारक नहीं होता है। इसके बावजूद दूरबीन या टेलीस्कोप का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों को वयस्कों की निगरानी में ही ग्रहण देखना चाहिए।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्रग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है और इससे स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि, पारंपरिक मान्यताओं के चलते कुछ लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ या भोजन से परहेज करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खगोलीय नजारा प्रकृति का अद्भुत दृश्य होता है, जिसे सुरक्षित तरीके से देखा और समझा जा सकता है।
