समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने गुरुवार को अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ पासपोर्ट हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है, जिसके बाद अब्दुल्ला आजम खान ने शीर्ष अदालत का रुख किया था। सुनवाई के दौरान, जस्टिस सुंदरेश ने राहत देने से इनकार करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "ट्रायल कोर्ट पर यकीन कीजिए। मामले को ट्रायल कोर्ट में तय होने दीजिए। अब जब ट्रायल पूरा हो गया है, तो हम दखल नहीं दे सकते हैं।"
फर्जी जन्मतिथि का आरोप
बता दें कि यह मामला पासपोर्ट में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है। अब्दुल्ला आजम खान के पासपोर्ट में जन्मतिथि गलत दी गई है।इस मामले में 9 सितंबर 2021 को आरोप तय किए गए, जिसके बाद रामपुर की सिविल लाइन थाना पुलिस द्वारा अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। FIR में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम खान ने पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का का प्रयोग किया है। आरोप है कि उनके पासपोर्ट में जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 दर्ज है, जबकि उनके स्कूल रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी वास्तविक जन्म तिथि 1 जनवरी 1993 है।
पासपोर्ट और स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि में स्पष्ट अंतर को फर्जीवारा का आधार बनाकर एफआईआर दर्ज कराई गई। इससे मामले में पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट में अब्दुल्ला आजम खान मामले को रद्द करने की अर्जी डाली थी। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में पूरा ट्रायल पहले ही हो चुका है, इसलिए मामले को रद्द करने की उनकी अर्जी को यहां खारिज कर दिया गया था। उसके बाद अब्दुल्ला आजम खान ने मामले से राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
दो पैन कार्ड मामले में भी मिला था झटका
फर्जी पासपोर्ट मामले के अलावा, अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड से जुड़े एक अन्य मामले में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से केवल निराशा हाथ लगी थी। अब्दुल्ला आजम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे इस मामले की संपूर्ण कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। दो पैन कार्ड मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और बाद में जुलाई में उनकी याचिका को खारिज किया था।
