लखनऊ

फाजिलनगर का नाम बदलकर होगा 'पावा नगर', CM योगी आदित्यनाथ ने की घोषणा

फाजिलनगर का नाम बदल कर जल्द ही पावा नगर हो जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसकी घोषणा की है। सीएम ने कहा, जल्द ही हमारी सरकार फाजिलनगर का नाम बदल कर पावा नगरी करने की कार्रवाई कर रही है।

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने फाजिलनगर का नाम पावा नगर करने की घोषणा की

उत्तर प्रदेश में जल्द ही फाजिलनगर का नाम बदल कर पावा नगर किया जा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी घोषणा की है। सीएम योगी ने कहा, 'जल्द ही हमारी सरकार फाजिलनगर का नाम बदल कर पावा नगरी करने की कार्रवाई कर रही है। सीएम योगी ने कहा कि भगवान महावीर का जन्म यद्यपि वैशाली में हुआ, लेकिन महापरिनिर्वाण उन्होंने उत्तर प्रदेश के ही पावागढ़ (फाजिलनगर) में पाया था। आज मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि हमारी सरकार ने उस फाजिलनगर, जहां भगवान महावीर ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था, उसका नाम पावा नगरी करने की कार्यवाही आगे बढ़ाई है।'

तरुण सागरम् तीर्थ, मुरादनगर में सीएम ने किया गुफा मंदिर का उद्घाटन

दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ आज यानी गुरुवार 27 नवंबर को तरुण सागरम् तीर्थ, मुरादनगर पहुंचे थे। यहां उन्होंने पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत 100 दिन में निर्मित गुफा मंदिर का उद्घाटन किया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भगवान पार्श्वनाथ जी व संत तरुण सागर जी महाराज को याद किया। सीएम ने मेरी बिटिया व अंतर्मना दिव्य मंगल पाठ पुस्तक का विमोचन भी किया।

यूपी का सौभाग्य, यहां अनेक जैन तीर्थंकरों का हुआ जन्म

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश का सौभाग्य है, अयोध्या में प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव व चार जैन तीर्थंकर पैदा हुए। दुनिया ने काशी में चार जैन तीर्थंकरों को अवतरित होते हुए देखा है। श्रावस्ती में जैन तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का जन्म हुआ। भगवान महावीर का महापरिनिर्वाण कुशीनगर के पावागढ़ में हुआ था। हमारी सरकार ने फाजिलनगर का नाम (जहां भगवान महावीर ने महापरिनिर्वाण हुआ था), उसके नामकरण की कार्रवाई को पावा नगरी के रूप में बढ़ाया है।

24 जैन तीर्थंकरों ने विश्व मानवता को दी करुणा, मैत्री व अहिंसा की प्रेरणा

सीएम योगी ने कहा कि 24 जैन तीर्थंकरों ने समाज को नई दिशा और विश्व मानवता को करुणा, मैत्री, अहिंसा व ‘जियो-जीने दो’ की प्रेरणा दी। उन्होंने सिर्फ मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव-जंतु के लिए नई प्रेरणा प्रदान की, जिसकी प्रासंगिकता आज भी उसी रूप में बनी हुई है। मानव सभ्यता को विकास की नित नई ऊंचाइयों तक पहुंचना है तो उन्हें भारत के अध्यात्म की शरण में जाना होगा। अध्यात्म के साथ ही भौतिक विकास, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक उन्नयन के लिए सुरक्षित, सुसभ्य, साफ-सुथरा वातावरण चाहिए, जिसे भारत ने पहले भी दुनिया को दिया है और भारत, ऋषि-मुनियों, परंपरा व भारतीय संस्कृति का संदेश आज भी विश्व मानवता के लिए यही है।

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विनोद मिश्रा
विनोद मिश्रा Author

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन ... और देखें

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