लखनऊ

'बाबा के यूपी' में लगता है माफियाओं को डर, यूं ही नहीं अतीक बोला- 'अब तो केवल रगड़ा जा रहा'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 12, 2023, 08:07 AM IST

Mafia Atiq Ahmed: उमेश पाल हत्याकांड मामले में कोर्ट में पेशी के लिए लाए जा रहे माफिया अतीक अहमद के चेहरे पर डर साफ झलक रहा है। उसे पहले ही आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। दूसरी बार कोर्ट में पेशी से पहले माफिया अतीक अहमद ने कहा है कि उसे केवल रगड़ा जा रहा है।

Mafia Atiq Ahmed: उमेश पाल हत्याकांड के बाद जब उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में माफियाओं को मिट्टी में मिलाने की बात कही तो विपक्ष नाराज हो गया। सीएम योगी की भाषा को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे। हालांकि, उनका यह भाषण माफियाओं के दिलों में घर जरूर कर गया। 1300 किलोमीटर दूर गुजरात की साबरमती जेल में बंद माफिया अतीक अहमद और बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी के भी कान खड़े हो गए, क्योंकि वे यह जानते थे कि कि सीएम योगी इससे पहले भी कई माफियाओं को जमींदोज कर चुके थे।

फिर चाहें बिकरू कांड के विकास दुबे की बात हो या फिर 2019 से फरार चल रहे पश्चिमी यूपी के माफिया बदन सिंह बद्दो की। अतीक और मुख्तार अंसारी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि सीएम योगी और उनके बुलडोजर का एक्शन रुकने वाला नहीं है। दरअसल, यूपी की जेलों से गले में सरेंडर की तख्ती डाले हुए माफियाओं की कई तस्वीरें सामने आती रहीं हैं, जिसमें इन माफियाओं के चेहरे पर एनकाउंटर का डर साफ झलकता है।

माफिया अतीक को सता रहा एनकाउंटर का डर

गुजरात की साबरमती जेल में बंद माफिया अतीक को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा है। दरअसल, उसे 16 दिन में दूसरी बार सड़क मार्ग से यूपी लाया जा रहा है। इससे पहले जब 27 मार्च को अतीक को प्रयागराज लाया गया था, तब भी उसने हत्या का अंदेशा जताया था। अब जब उमेश पाल हत्याकांड में कोर्ट में पेशी के लिए दूसरी बाद प्रयागराज लाया जा रहा है, तब भी उसे डर सता रहा है।

यूं ही नहीं बोला... अब तो केवल रगड़ा जा रहा

माफिया अतीक अहमद के दो वीडियो सामने आए हैं। साबरमती जेल से निकलने के बाद जब राजस्थान के बूंदी में जिले में अतीक का काफिला रुका तो उसने मीडिया से बात की। अतीक ने कहा, उसकी माफियागिरी तो पहले ही खत्म हो गई थी। अब उसे केवल रगड़ा जा रहा है। अतीक अहमद यहां ही नहीं रुका वह यह भी बोला कि उसका पूरा परिवार बर्बाद हो गया। इसके बाद जब उसका काफिला मध्य प्रदेश के शिवपुरी में रुका तो उसने मीडिया का धन्यवाद दिया। कहा- आप लोग हैं, तो हिफाजत है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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