लखनऊ

लखनऊ का ऐतिहासिक छतर मंजिल बनेगा हेरिटेज होटल, जल्द दिखेगा इसका नया स्वरूप

लखनऊ की प्रसिद्ध छतर मंजिल को हेरिटेज होटल में तब्दील करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस परियोजना की जिम्मेदारी गोल्डन ट्राएंगल फोर्ट ऐंड पैलेस को सौंपी गई है। अगले दो वर्षों में ये होटल पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। ऐसे में इसकी साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया गया है।

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लखनऊ का छतर मंजिल जल्द ही बनेगा हेरिटेज होटल

Photo : Twitter

लखनऊ की ऐतिहासिक छतर मंजिल को हेरिटेज होटल में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस जिम्मेदारी को गोल्डन ट्राएंगल फोर्ट ऐंड पैलेस को सौंपा गया है, जो पहले से ही जैसलमेर में सूर्यागढ़, बीकानेर में नरेंद्र भवन और बिनसर में मैरी बुडेन जैसे प्रतिष्ठित हेरिटेज होटल संचालित कर रही है। माना जा रहा है कि इस कार्य में लगभग दो साल का समय लग जाएगा, जिसके बाद ये जगह राजस्थान की तरह डेस्टिनेशन वेडिंग और अन्य बड़े कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त बन जाएगी।

पर्यटन विभाग ने शहर की कई ऐतिहासिक इमारतों को पीपीपी मॉडल के तहत पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए कई निजी कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया है। लखनऊ में छतर मंजिल के अलावा कोठी रोशन-उद-दौला, कोठी इरम, कोठी दर्शन विलास और फरहत बख्श कोठी को भी संवारने की योजना बनाई गई है। फिलहाल, छतर मंजिल के परिसर में कार्य प्रारंभ हो चुका है। परिसर में उगी झाड़ियों को हटाकर इमारत की रंगाई-पुताई की जा रही है। इस कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आम जनता के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।

मई से आर्किटेक्ट और इंजीनियर आएंगे

छतर मंजिल परिसर में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें यहां केवल गंदगी हटाने का निर्देश दिया गया है। इमारत के अंदर भी सफाई की जा रही है। कर्मचारियों के अनुसार, मई से आर्किटेक्ट और इंजीनियर यहां आकर कार्य की निगरानी करेंगे। इस स्थिति में संभावना जताई जा रही है कि मई के पहले सप्ताह से बड़े स्तर पर कार्य प्रारंभ होगा

स्ट्रक्चर में नहीं होगा बदलाव

इस ऐतिहासिक इमारत को हेरिटेज होटल में तब्दील करने के दौरान इसकी वास्तुकला में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही, पुराने किलों, महलों और हवेलियों के संरक्षण के साथ-साथ राज्य की संस्कृति, स्थानीय भोजन और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का भी उद्देश्य है। परिसर में विशाल बरगद के पेड़ हैं, जिन्हें नहीं हटाया जाएगा, हालांकि सूखे पेड़ों को काटा जाएगा।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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