Delhi AIIMS: दिल्ली एम्स के करीब 13 वर्षों तक चक्कर काटने के बाद भी जब कोटा की बेटी तन्वी की जान नहीं बच सकी, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। कोटा के गुमानपुरा स्थित संगम होटल वाली गली के निवासी मुकेश परियानी अपनी बेटी का शव लेकर जब घर पहुंचे, तो परिजनों का कलेजा फट पड़ा। बेटी के अंतिम संस्कार के बाद पिता ने इस पूरी घटना को मेडिकल लापरवाही बताते हुए अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
मुकेश परियानी का कहना है कि उन्होंने अपनी मासूम बेटी को तो खो दिया, लेकिन अब वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि वे इस मामले की शिकायत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से करेंगे। मुकेश ने मांग की है कि 24 अगस्त को तन्वी का इलाज करने वाले डॉ. सचिन तलवार और उनकी पूरी टीम के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही उन्होंने इलाज में हुई कथित देरी की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित डॉक्टरों के नार्को टेस्ट कराने की भी मांग उठाई है।
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तन्वी की मां ने भी डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप
तन्वी की मां भाविका परियानी ने भी भारी मन से डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी शुरुआत में इतनी बीमार नहीं थी, लेकिन सही समय पर सही इलाज न मिलने के कारण उसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई। मां ने यह भी आरोप लगाया कि पीएमओ में शिकायत करने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला और उनके साथ धोखा हुआ। दूसरी ओर, इस विवाद के बीच एम्स प्रशासन ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है। एम्स के अनुसार, तन्वी को पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी विभाग में लाया गया था।
Delhi AIIMS क्या बोला?
उस समय जांच में पता चला कि वह जन्मजात दिल की एक गंभीर बीमारी (Ventricular Septal Defect with Pulmonary Atresia) से पीड़ित थी। इसमें दिल से फेफड़ों तक खून पहुंचने का रास्ता बंद या बेहद बाधित रहता है। एम्स का दावा है कि 2013 के दौरान सीटी एंजियोग्राफी और कैथीटेराइजेशन जैसी कई जटिल जांचें करके यह समझने की कोशिश की गई थी कि क्या सर्जरी संभव है। बहरहाल, एम्स के तर्कों से परे, एक बदहवास परिवार अब केवल अपनी बेटी के लिए इंसाफ चाहता है और कानूनी लड़ाई लड़ने दिल्ली लौटने की तैयारी में है।
