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'अब माता-पिता ही नहीं, कोई भी दे सकेगा एक लाख रुपये की जमानत राशि', DUSU चुनाव को लेकर दिल्ली HC का बड़ा फैसला

DUSU Elections: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि डूसू चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की ओर से एक लाख की जमानत राशि केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि कोई भी ऐसा व्यक्ति दे सकता है, जो यह राशि देने में सक्षम हो।

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डूसू चुनाव को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)

DUSU Elections: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की ओर से एक लाख रुपये की जमानत राशि केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि कोई भी ऐसा व्यक्ति दे सकता है, जो यह राशि देने में सक्षम हो।

अदालत ने यह आदेश 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) कार्यकर्ताओं अनन्या रतूड़ी और अक्षत शिखर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में डूसू चुनाव समिति द्वारा निर्धारित उस शपथपत्र को चुनौती दी गई थी जिसमें उम्मीदवारों के लिए अपने माता-पिता या अभिभावक की सहमति और उनकी ओर से एक लाख रुपये की जमानत राशि देना अनिवार्य किया गया था।

'शर्त उचित और तर्कसंगत'

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा, ''यह शर्त उचित और तर्कसंगत है, सिवाय इसके कि जमानत केवल माता-पिता द्वारा ही नहीं दी जानी चाहिए। इसे कोई भी व्यक्ति दे सकता है, जिसमें ऐसा अभिभावक भी शामिल है, जो एक लाख रुपये देने और जमानतदार बनने की स्थिति में हो।'' अदालत ने कहा, ''केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम कोई भी व्यक्ति यह राशि दे सकता है।''

'कॉलेज की दीवार हो जाती है बेहद खराब'

अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान अफरा-तफरी होती है और प्रत्येक कॉलेज की दीवारों की हालत बेहद खराब हो जाती है। याचिका के अनुसार, शपथपत्र में कहा गया है कि छात्र की पढ़ाई का खर्च उठाने वाले माता-पिता या अभिभावक को जमानतदार बनना होगा। यदि उम्मीदवार या उसके समर्थक चुनाव संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं, तो एक लाख रुपये तक की राशि वसूल की जा सकती है।

उम्मीदवारों को इस शपथपत्र के तहत अपने और अपने माता-पिता या अभिभावक के बैंक खाते का विवरण भी देना होगा। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि यह व्यवस्था 2025 के चुनाव में भी लागू थी और इस वर्ष इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह शर्त केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए लगाई गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कॉलेजों की दीवारों समेत अन्य संपत्ति की हालत खराब हो जाती है।

कब होने वाला है DUSU चुनाव?

उन्होंने कहा कि माता-पिता से जमानत लेने का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि यदि उम्मीदवार शपथपत्र की शर्तों का उल्लंघन करता है तो कोई आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति उस राशि का भुगतान कर सके। डूसू चुनाव 18 सितंबर को होने हैं और परिणाम 19 सितंबर को घोषित किए जाने की उम्मीद है।

आइसा ने आरोप लगाया है कि यह शर्त वयस्क छात्रों की स्वायत्तता को प्रभावित करती है और खासकर महिलाओं तथा अपने परिवार पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं रहने वाले छात्रों को चुनाव लड़ने से रोक सकती है। वामपंथी छात्र संगठन ने एक बयान में कहा कि विश्वविद्यालय आने वाले छात्र वयस्क और स्वतंत्र हैं तथा यदि वे चाहें तो किसी भी प्राधिकारी की अनुमति के बिना चुनाव लड़ सकते हैं। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि इस शर्त का महिला छात्रों पर असमान प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि उनके परिवार उनकी राजनीतिक भागीदारी को सीमित कर सकते हैं।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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