हैदराबाद : तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने राज्य में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फेरबदल करते हुए मंत्री कोंडा सुरेखा को मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया है। उनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी की सिफारिश औपचारिक मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेज दी गई है। कोंडा सुरेखा को हटाने का फैसला उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता की ओर से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पारकल से विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद आया है। इन टिप्पणियों के बाद पार्टी के भीतर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) की अनुशासन समिति ने कोंडा सुरेखा को नोटिस जारी किया था।
पारकल विधानसभा सीट को लेकर शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद पारकल विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। हाल ही में विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मौजूदा विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था। उन्होंने लोगों से आगामी चुनाव में एक बार फिर उन्हें समर्थन देने की अपील भी की थी।
वहीं, TPCC अनुशासन समिति को दिए अपने स्पष्टीकरण में कोंडा सुरेखा ने कहा कि उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता की टिप्पणियां पूरी तरह से उनकी व्यक्तिगत राय थीं। सुरेखा का कहना था कि केवल पारिवारिक संबंधों के आधार पर किसी अन्य व्यक्ति से राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने या उसके विचारों को लेकर जवाब मांगना उचित नहीं है।
योजना बोर्ड समेत कई अहम पदों पर फेरबदल
मंत्रिमंडल में बदलाव के साथ ही राज्य सरकार ने कई प्रमुख वैधानिक बोर्ड और आयोगों में भी बड़े स्तर पर नियुक्तियां और बदलाव किए हैं। तेलंगाना योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर जी. चिन्ना रेड्डी की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। उनकी जगह गडवाल विजयलक्ष्मी को तेलंगाना योजना बोर्ड का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने नेरेला शारदा को हैदराबाद स्थित तेलंगाना राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। वहीं, पूर्व राज्यसभा सांसद सुधा रानी को काकतीय शहरी विकास प्राधिकरण (KUDA) का नया अध्यक्ष नियुक्त करने की भी स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के इस फैसले को तेलंगाना की राजनीति और प्रशासन में एक अहम फेरबदल के रूप में देखा जा रहा है। कोंडा सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने के साथ ही कई महत्वपूर्ण बोर्ड और आयोगों में नई नियुक्तियों ने राज्य की राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
