Supreme Court CCTV Police Station Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देशभर के पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था को लेकर राज्यों के अनुपालन की समीक्षा की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र की ओर से प्रस्तावित नई पुलिस के आधुनिकीकरण (PMM) को लेकर फंडिंग और मौजूदा सीसीटीवी सिस्टम को मजबूत करने पर सवाल उठाए।
सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने 31 अगस्त 2026 का अपना हलफनामा दाखिल किया है। इसमें पुलिस आधुनिकीकरण के लिए नई योजना का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत अगले पांच साल में 24,000 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है।
पुलिस के आधुनिकीकरण के मिशन का रखा प्रस्ताव
केंद्र के प्रस्ताव के मुताबिक पुलिस मॉर्डनाइजेशन मिशन के जरिए पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की योजना है। इसमें टेक्नोलॉजी, लक्षित निवेश और सुधारों के जरिए पुलिस व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने की बात कही गई है। दवे ने बताया कि मौजूदा पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत असम की योजना को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मिशन में पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरों के लिए पर्याप्त प्रावधान होंगे और सीसीटीवी पुलिस आधुनिकीकरण का अहम हिस्सा है।
SC ने पूछा- मौजूदा फंड अभी क्यों नहीं इस्तेमाल कर सकते?
इस दौरान एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि असम की मौजूदा योजना अब खत्म होने के करीब है। इसलिए कोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पहले से उपलब्ध फंड लैप्स न हो और सीसीटीवी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंडिंग में कोई रुकावट न आए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि मौजूदा योजना में बचे हुए फंड को नई योजना में ट्रांसफर करने की बात हलफनामे में कहां है? कोर्ट ने यह भी पूछा कि मौजूदा योजना के तहत उपलब्ध फंड का इस्तेमाल तुरंत मौजूदा CCTV सिस्टम को मजबूत करने के लिए क्यों नहीं किया जा सकता।
बेंच ने साफ किया कि नई योजना आने तक पुलिस स्टेशनों में CCTV को लेकर मौजूदा फंडिंग की कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र का हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया और ASG राजा ठाकरे से इस मुद्दे पर केंद्र से और निर्देश लेने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
झारखंड पर SC की सख्त टिप्पणी
इसके बाद कोर्ट ने झारखंड में पुलिस स्टेशनों पर CCTV कैमरों की स्थिति पर सुनवाई की। बेंच ने कहा कि ऐसा लगता है कि झारखंड ने 3 अगस्त को कोर्ट द्वारा मांगी गई खास जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई है। कोर्ट ने राज्य से इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
इसी दौरान सिद्धार्थ दवे ने झारखंड की स्थिति को लेकर कहा कि,'2020 से एक भी CCTV कैमरा नहीं, एक भी नहीं, माई लॉर्ड।'
इस टिप्पणी के बाद झारखंड में पुलिस स्टेशनों के सीसीटीवी इंतजाम को लेकर मामले की गंभीरता सामने आई। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
