Ketan Murder Case: पुणे के बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए जेएमएफसी (JMFC) ए एम विभूते की अदालत ने दोनों मुख्य आरोपियों चेतन चौधरी और सिया गोयल को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है। इस अवधि के दौरान दोनों आरोपियों को पुणे (Pune Murder Case) की फेमस येरवड़ा जेल में सलाखों के पीछे रहना होगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) की ओर से वकील राजश्री विरकुड और सरकारी वकील विपुल दुशिंग ने आरोपियों की पुलिस कस्टडी बढ़ाने के लिए पांच मुख्य आधार पेश किए। उन्होंने अदालत को बताया कि जांच अधिकारियों ने आरोपी सिया गोयल के घर से एक साल पुराना मोबाइल फोन बरामद किया है।
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इसके अलावा, आरोपियों के मौजूदा फोन से डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर कर लिया गया है। हालांकि, इस डेटा और व्हाट्सएप चैट में कई जगह संदिग्ध 'कोड वर्ड' और 'निकनेम' का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस का कहना है कि इस कोडेड भाषा का सच सामने लाने के लिए आरोपियों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है।
बचाव पक्ष ने किया कस्टडी का विरोध
दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस की इस मांग का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी पहले ही 12 दिनों तक पुलिस की कस्टडी में रह चुके हैं, और अब पुलिस के पास रिमांड बढ़ाने की कोई ठोस या नई वजह नहीं है। बचाव पक्ष ने पुलिस की इस कार्रवाई को "फिशिंग इंक्वायरी" (अंधेरे में तीर चलाना) करार दिया।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 20 का हवाला देते हुए कहा कि कानूनन किसी भी आरोपी को खुद के खिलाफ गवाही देने या खुद को दोषी ठहराने वाली बातों को समझाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
आने वाले समय में और हो सकते हैं चौंकाने वाले खुलासे
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को फिलहाल जेल भेज दिया है, जबकि पुलिस कस्टडी बढ़ाने की अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इन डिजिटल सबूतों से केतन मर्डर केस की कितनी परतें खुलती हैं।
