कानपुर

ध्यान दें! कानपुर-लखनऊ हाईवे पर एक महीने तक रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन, यहां से निकाले जाएंगे वाहन

Kanpur-Lucknow Highway: कानपुर-लखनऊ हाईवे पर करीब एक महीने तक डायवर्जन रहेगा। उन्नाव में फ्लाईओवर के लिए दूसरी लेन पर गर्डर रखे जाएंगे, लिहाजा दोनों तरफ के वाहन एक ही लेन से निकाले जाएंगे।

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हाईवे पर वाहन

Kanpur-Lucknow Highway: कानपुर-लखनऊ हाईवे से आवागमन करने वालों के लिए खबर है। अब एक माह तक उन्नाव के सोनिक के पास गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) के फ्लाईओवर के लिए हाईवे की दूसरी लेन (लखनऊ से कानपुर) पर गर्डर रखने का काम होगा। कुल 16 गर्डर रखने और उन्हें जोड़ने के लिए एक महीने तक डायवर्जन रखा जाएगा। लिहाजा, दोनों तरफ के वाहन एक ही लेन से पास किए जाएंगे। इस दौरान ट्रैफिक काफी स्लो रहेगा और जाम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। आइये जानते हैं वाहनों को कहां से पास किया जाएगा?

गंगा एक्सप्रेसवे का फ्लाईओवर हो रहा तैयार

दरअसल, प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 से पहले गंगा एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए खोलना है। गंगा एक्सप्रेसवे उन्नाव से होकर गुजर रहा है। सोनिक मोड़ के पास एक्सप्रेसवे को पास करने के लिए फ्लाईओवर बनाने का काम 20 अक्टूबर से किया जा रहा है। कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाली लेन पर काम कराया गया और इस दौरान भी करीब 52 दिनों तक ट्रैफिक डायवर्जन 20 मीटर तक ट्रैफिक डायवर्जन रखा गया था। 12 दिसंबर को एक लेन का खत्म होने के बाद अब लखनऊ की ओर जाने वाली लेन पर बाकी बचे 16 गार्डर रखने हैं। निर्माण एजेंसी ने काम शुरू कर दिया है।

हाईवे का ट्रैफिक बशीरतगंज के पास से कानपुर लेन से निकाला जाएगा और ये वाहन सोनिक मोड़ से आगे फिर से अपनी अलग-अलग लेन में चल सकेंगे। फिलहाल, निर्माण एजेंसी ने यातायात पुलिस से इसकी इजाजत ले ली है। डायवर्जन से जाम की स्थिति न पैदा हो, इसके लिए अतिरिक्त कर्मचारी लगाए जाएंगे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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