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4-लेन होगा NH-715 का ये हिस्सा, हाईवे चौड़ीकरण से फर्राटा भरेंगी गाड़ियां; काजीरंगा पार्क का दिखेगा नजारा

असम में राष्ट्रीय राजमार्ग 715 के कलियाबोर-नुमालीगढ़ खंड को चौड़ा किया जाएगा। इसके लिए कैबिनेट ने 6,957 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

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हाईवे (फोटो-Istock)

NH-715 : असम के पहाड़ी हिस्सों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 715 के कलियाबोर-नुमालीगढ़ खंड को चौड़ा करने को मंजूरी मिल गई है। इसकी कुल लागत 6,957 करोड़ रुपये होगी। यह परियोजना इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी) प्रारूप में विकसित की जाएगी। इसकी कुल लंबाई 85.675 किलोमीटर और कुल पूंजीगत लागत 6,957 करोड़ रुपये होगी। परियोजना में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) खंड पर प्रस्तावित वन्यजीव-अनुकूल उपायों का कार्यान्वयन भी शामिल है।

एनएच-715 रूट मैप

राष्ट्रीय राजमार्ग-715 (पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग-37) का मौजूदा कलियाबोर-नुमालीगढ़ खंड दो ‘लेन’ का है जो घनी आबादी वाले जाखलाबंधा (नागांव) और बोकाखाट (गोलाघाट) कस्बों से होकर गुजरता है। मौजूदा राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा या तो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर या उद्यान की दक्षिणी सीमा के साथ-साथ गुजरता है जिसमें मार्गाधिकार (आरओडब्ल्यू) 16-32 मीटर तक सीमित है जो काफी खराब ज्यामितीयता के कारण और भी अधिक कठिन हो गया है।

मानसून के दौरान, पार्क के अंदर का इलाका जलमग्न हो जाता है जिससे वन्यजीव मौजूदा राजमार्ग को पार करके पार्क से कार्बी-आंगलोंग पहाड़ियों की ओर चले जाते हैं। राजमार्ग पर चौबीसों घंटे भारी यातायात के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं और कई बार जंगली जानवरों की भी मौत हो जाती है।

परियोजना संरेखण दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-127, एनएच-129) और एक राज्य राजमार्ग (एसएच-35) के साथ एकीकृत है जो समूचे असम में प्रमुख आर्थिक, सामाजिक एवं लॉजिस्टिक्स बिंदुओं (नोड) को निर्बाध संपर्क प्रदान करता है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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