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एक फोन कॉल, कुछ आखिरी शब्द और फिर सन्नाटा...नेपाल बाढ़ में लापता अभिषेक की बाट जोह रहा परिवार, पापा के कानों अब भी गूंज रही बेटे की आवाज

Maharashtra News: नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 28 वर्षीय अभिषेक घोने से परिवार का संपर्क टूट गया है। कल्याण में उनका परिवार अब हर पल बेटे की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है, जबकि पिता के कानों में उसकी आखिरी फोन कॉल की आवाज गूंज रही है। अभिषेक की तलाश में परिवार ने अधिकारियों से संपर्क किया है और एआई की मदद से मिले संभावित संकेत ने उम्मीद जगाई है, लेकिन अभी तक कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है।

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नेपाल त्रासदी में अब तक 669 लोगों की मौत (फोटो- PTI)

Photo : PTI

Maharashtra News: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण में एक परिवार इन दिनों उम्मीद और चिंता के बीच अपने 28 वर्षीय बेटे अभिषेक घोने की तलाश में है। पिता के कानों में बेटे से हुई आखिरी फोन पर बातचीत की आवाज बार-बार गूंज रही है। उस बातचीत में अभिषेक कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर बेहद उत्साहित था। परिवार को क्या पता था कि कुछ ही घंटे बाद यही बातचीत उनकी सबसे आखिरी याद बन जाएगी।

कल्याण निवासी अभिषेक घोने एक यात्रा बुकिंग पोर्टल पर काम करते हैं। लंबे समय से कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारी कर रहे अभिषेक 24 अगस्त को नेपाल के काठमांडू के लिए रवाना हुए थे। मंगलवार देर रात उन्होंने घर पर फोन किया था। उन्होंने परिवार को बताया कि उनका ग्रुप अगले दिन सुबह जल्दी यात्रा के अगले पड़ाव के लिए रवाना होने वाला है। फोन पर उनकी आवाज में यात्रा को लेकर उत्साह साफ महसूस हो रहा था। लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद हालात पूरी तरह बदल गए। बुधवार को मध्य नेपाल के रसुवा समेत कई इलाकों में अचानक आई बाढ़ और भारी तबाही की खबरें सामने आने लगीं। इसी दौरान अभिषेक से परिवार का संपर्क टूट गया। इसके बाद से उनका फोन नहीं लगा और परिवार के लिए हर गुजरता घंटा बेचैनी बढ़ाता चला गया।

एआई आधारित तकनीक की मदद लेने की कोशिश

अभिषेक के पिता ने शनिवार को बताया कि परिवार ने बेटे की जानकारी हासिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन अब तक उन्हें कोई पुख्ता सूचना नहीं मिल पाई है। परिवार लगातार इस उम्मीद में है कि कहीं से अभिषेक की सुरक्षित होने की खबर मिल जाए। बेटे की तलाश में अभिषेक के एक दोस्त ने एआई आधारित तकनीक की मदद लेने की भी कोशिश की। तकनीकी संकेतों के आधार पर यह संभावना जताई गई कि अभिषेक किसी सुरक्षित स्थान पर हो सकते हैं। हालांकि, यह जानकारी आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हुई है, इसलिए परिवार इस संकेत को उम्मीद की एक किरण तो मान रहा है, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर नहीं हो सकता।

पिता के कानों में बेटे की आवाज लगातार गूंज रही है

अभिषेक के पिता के लिए सबसे मुश्किल वह आखिरी बातचीत है, जिसे वह चाहकर भी भूल नहीं पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा इस तीर्थयात्रा को लेकर काफी समय से योजना बना रहा था और यात्रा शुरू होने को लेकर बहुत खुश था। मंगलवार रात फोन पर उसने सुबह जल्दी निकलने की बात कही थी। उसके बाद से फोन की घंटी तो नहीं बजी, लेकिन पिता के कानों में बेटे की वही आवाज लगातार गूंज रही है। परिवार की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि खबरों के मुताबिक नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र के चार लोगों के लापता होने की सूचना है। ऐसे में अभिषेक के परिवार की निगाहें अब प्रशासन और राहत-बचाव एजेंसियों से मिलने वाली किसी भी जानकारी पर टिकी हैं। एक पिता के लिए यह इंतजार सिर्फ किसी खबर का इंतजार नहीं है, बल्कि उस बेटे के वापस लौटने की उम्मीद है, जो घर से तीर्थयात्रा पर निकला था और जिसकी आखिरी आवाज अब परिवार की सबसे अनमोल याद बन गई है। बता दें कि नेपाल त्रासदी में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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