कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने 'वंदे मातरम्' को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जोरदार सियासी हमला बोला है। तमिलनाडु के मदुरै में संसद के हालिया मानसून सत्र में पारित विधेयकों पर बोलते हुए चिदंबरम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 'वंदे मातरम् राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' के जरिए जानबूझकर एक अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश की है।
राज्यसभा सांसद चिदंबरम ने भाजपा से सीधा सवाल पूछते हुए कहा कि जिन्हें वंदे मातरम् के वास्तविक इतिहास का ज्ञान नहीं है, वही लोग ऐसे कानून बना रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या स्वतंत्रता संग्राम के 100 वर्षों के लंबे इतिहास में किसी एक भी जगह का ऐसा रिकॉर्ड है जहां आरएसएस, हिंदू महासभा या जनसंघ के नेताओं ने कभी 'वंदे मातरम्' गाया हो? अगर ऐसा हुआ होता, तो उस दौर के अखबारों और दस्तावेजों में इसका जिक्र जरूर मिलता।
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बाकी अंतरों में धार्मिक देवी-देवताओं की स्तुति-पूर्व केंद्रीय मंत्री
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् के कुल छह अंतरों में से केवल शुरुआती दो अंतरे ही राष्ट्र की वंदना करते हैं, जबकि बाकी अंतरों में धार्मिक देवी-देवताओं की स्तुति है। इसी वजह से आजादी से पहले कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद ने रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव के आधार पर सर्वसम्मति से केवल शुरुआती दो अंतरे गाने का फैसला लिया था।
'5 मिनट में पास कराए बिल'
चिदंबरम ने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के पुराने नेता इन अंतरों को अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन भाजपा को तो दो अंतरे भी ठीक से याद नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दोपहर में महज 5 मिनट के भीतर बिना उचित बहस के इस विधेयक को संसद से पारित करा दिया गया, जो केवल राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है।
