जयपुर

Kota News : शादी के जश्न में डूबे मां-बाप को नहीं रही मासूम की सुध, कार में तड़प-तड़पकर तोड़ दिया दम

राजस्थान के कोटा में एक तीन साल की बच्ची की बंद कार में दम घुटने से मौत हो गई। एक शादी समारोह में शामिल होने गए माता पिता अपनी मासूम बेटी को अनजाने में कार में छोड़कर भूल गए थे।

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कार में बच्ची की मौत

Photo : Twitter

कोटा : शहर में एक शादी समारोह में शामिल होने आया दंपत्ति अपनी तीन साल की मासूम बच्ची को अनजाने में कार के अंदर ही छोड़कर भूल गया। दरवाजे और शीशे बंद होने के कारण बच्ची को हवा नहीं मिल सकी, जिससे उसकी दम घुटने से मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, घटना बुधवार शाम की है। उन्होंने पीड़िता की पहचान गोरविका नगर के रूप में की।

असमंजस में गई बच्ची की जान

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित बच्ची के पिता प्रदीप नागर अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ जोरावरपुरा गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। खतोली पुलिस थाने के प्रभारी बन्ना लाल ने कहा कि जैसे ही परिवार कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा, मां और उसकी बड़ी बेटी कार से बाहर आईं और प्रदीप वाहन पार्क करने चला गया।

कार को लॉक कर भूला पिता

पिता ने यह मानकर कि गोर्विका अपनी मां के साथ कार्यक्रम स्थल के अंदर गई है। लिहाजा, प्रदीप ने कार को लॉक कर दिया और समारोह में शामिल होने के लिए चला गया। लगभग दो घंटे तक दोनों माता-पिता अलग-अलग रिश्तेदारों मिलते रहे। जब दंपत्ति की मुलाकात हुई तो उन्होंने एक-दूसरे से गोर्विका के बारे में पूछा। तब उन्हें पता चला कि वह शुरू से ही उनमें से किसी के साथ नहीं थी। इस पर उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी। जब उन्होंने कार की खिड़की खोली तो बच्ची पिछली सीट पर बेहोश मिली। उसे तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल, माता-पिता ने बच्ची के शव के परीक्षण कराने और पुलिस मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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