शहर

हादसे पर हादसे, फिर भी दिल्ली में कैसे बन जाती हैं अनऑथोराइज्ड बिल्डिंगें? पुराने हादसों से क्यों नहीं लिया जाता सबक

Satya Niketan Building Collapse: देश की राजधानी दिल्ली में बिल्डिंगें गिरने के कई हादसे होने के बावजूद अनधिकृत और जर्जर इमारतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती? सत्य निकेतन हादसे के बाद एक बार फिर भवन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

Image

Satya Niketan Building Collapse: पुराने हादसों से क्यों नहीं लिया जाता सबक?

Photo : PTI

Satya Niketan Building Collapse: कल यानी रविवार 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला आवासीय इमारत गिर गई। इस बिल्डिंग में पीजी चलाया जा रहा था और 27 घंटे के रेस्क्यू अभियान के बाद 5 घायलों को बचाया जा सका है, जिसमें से तीन की स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस हादसे में 7 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इस घटना ने राजधानी दिल्ली में अनधिकृत निर्माण और जर्जर इमारतों की निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हर बार हादसे के बाद जांच और कार्रवाई शुरू होती है, लेकिन बड़ा प्रश्न तो यही है कि जिन इमारतों में निर्माण नियमों का उल्लंघन होता है, उनकी पहचान और कार्रवाई समय रहते क्यों नहीं हो पाती? क्या हमारी एजेंसियों को गहरी निद्रा से जगाने के लिए हर बार ऐसे हादसों का होना जरूरी है? क्या में समय रहते अपनी आंखें नहीं खोल सकते? दिल्ली में पिछले वर्षों में बिल्डिंग गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान गई। इसके बावजूद कई जर्जर और अनधिकृत इमारतें सालों तक आबादी वाले इलाकों में खड़ी रहती हैं।

सत्य निकेतन में पहले भी गिरी थी बिल्डिंग

दिल्ली में धौला कुआं इलाके के सत्य निकेतन में मौजूदा हादसा इसलिए भी सवाल खड़े करता है क्योंकि इसी इलाके में 25 अप्रैल 2022 को भी एक पुरानी तीन मंजिला इमारत गिर चुकी है। बताया गया कि उस समय इमारत में अवैध मरम्मत का काम चल रहा था। हादसे में तब दो मजदूरों की मौत हुई थी। तब भी नगर निगम की ओर से नोटिस दिए जाने के बावजूद काम जारी रहने का मामला सामने आया था।

अब चार साल बाद उसी इलाके में फिर से इमारत गिरने की घटना यह सवाल उठाती है कि पहले हादसे के बाद इलाके में पुरानी और कमजोर इमारतों की निगरानी कितनी प्रभावी रही। क्या ऐसी पुरानी और कमजोर इमारतों की पहचान के लिए निगम ने कोई कदम उठाए भी या नहीं? अगर निगम ने कोई कार्रवाई की और अहम कदम उठाए तो फिर यह हादसा कैसे हो गया?

रोहिणी से साकेत तक हादसे ही हादसे

दिल्ली में सिर्फ सत्य निकेतन ही नहीं, बल्कि हाल के वर्षों में दूसरे इलाकों में भी इमारतों के गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसी साल 8 जुलाई को रोहिणी सेक्टर-16 में भारी बारिश के दौरान निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत ढह गई थी। यहां भी मलबे में दबने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में लगातार हुई भारी बारिश को संभावित वजहों में शामिल किया गया था।

इससे पहले 30 मई 2026 को दक्षिण दिल्ली में साकेत के सैदुलाजाब इलाके में पांच मंजिला इमारत पास में ही बनी एक कैंटीन पर जा गिरी। इस हादसे में भी छह लोगों की मौत हो गई थी। जांच के दौरान कथित अनधिकृत निर्माण और इमारत में अतिरिक्त निर्माण से जुड़े सवाल सामने आए थे।

पहाड़गंज और मुस्तफाबाद में भी गई जान

17 मई 2025 को पहाड़गंज में एक निर्माणाधीन इमारत का बेसमेंट धंसने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। तेज आंधी और बारिश के बीच दीवार कमजोर होने के चलते यह हादसा हुआ था। अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद में चार मंजिला इमारत गिरने से 11 लोगों की मौत ने भी दिल्ली में भवन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे। हादसे के बाद अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की बातें सामने आईं, लेकिन सवाल यही रहा कि निर्माण के दौरान ही नियमों के उल्लंघन की पहचान क्यों नहीं हुई।

2010, 2011 और 2021 में भी जर्जर इमारत ने ली थी जानें

सितंबर 2021 में सब्जी मंडी-मलकागंज इलाके में पुरानी जर्जर इमारत गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई थी। इससे पहले नवंबर 2010 में लक्ष्मी नगर के ललिता पार्क में पांच मंजिला अवैध इमारत गिरने से 71 लोग असमय काल के गाल में समा गए थे और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। 2011 में चांदनी महल इलाके में पास के प्लॉट में बेसमेंट की खुदाई के दौरान सटी हुई चार मंजिला इमारत गिर गई थी, जिसमें सात लोगों की जान चली गई थी।

प्रश्न कार्रवाई पर नहीं, पहले निगरानी का है

दिल्ली में इन घटनाओं का सिलसिला बताता है कि सिर्फ बारिश, पुरानी इमारत या निर्माणाधीन ढांचे को हादसे की वजह बताना ही पर्याप्त नहीं है। असली प्रश्न यह है कि अनधिकृत निर्माण शुरू होने के समय ही उसकी पहचान कौन करेगा और जर्जर इमारतों को खतरनाक घोषित करने के बाद कार्रवाई कितनी तेजी से होगी?

सत्य निकेतन की घटना ने एक बार फिर दिल्ली की भवन सुरक्षा व्यवस्था की उस कमजोर कड़ी को सामने ला दिया है, जहां कार्रवाई अक्सर हादसे के बाद दिखाई देती है। जरूरत इस बात की है कि निर्माण के दौरान निगरानी, नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई और जोखिम वाली पुरानी इमारतों की नियमित जांच को प्रभावी बनाया जाए, ताकि अगली दुर्घटना के बाद फिर वही सवाल न उठे कि हादसे से पहले जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे?

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें

हादसे पर हादसे, फिर भी दिल्ली में कैसे बन जाती हैं अनऑथोराइज्ड बिल्डिंगें? पुराने हादसों से क्यों नहीं लिया जाता सबक

हादसे पर हादसे, फिर भी दिल्ली में कैसे बन जाती हैं अनऑथोराइज्ड बिल्डिंगें? पुराने हादसों से क्यों नहीं लिया जाता सबक

दुबई दौरे से निवेश की नई उड़ान भर रहा मध्य प्रदेश, CM मोहन यादव ने गिनाईं AI, IT से लेकर डिफेंस तक की बड़ी संभावनाएं

दुबई दौरे से निवेश की नई उड़ान भर रहा मध्य प्रदेश, CM मोहन यादव ने गिनाईं AI, IT से लेकर डिफेंस तक की बड़ी संभावनाएं

₹10-₹20 के नोटों पर चिपकाई जाती थी महिला की फोटो और अभद्र चिट्ठियां, अलग-अलग नंबरों से आते थे अश्लील फोन; इस तरह पकड़ा गया आरोपी

₹10-₹20 के नोटों पर चिपकाई जाती थी महिला की फोटो और अभद्र चिट्ठियां, अलग-अलग नंबरों से आते थे अश्लील फोन; इस तरह पकड़ा गया आरोपी

दिल्ली सत्य निकेतन हादसा: प्रॉपर्टी पत्नी उर्मिला के नाम, बिजली कनेक्शन हरीराम-बेटे महेश के नाम पर, तीनों गिरफ्तार

दिल्ली सत्य निकेतन हादसा: प्रॉपर्टी पत्नी उर्मिला के नाम, बिजली कनेक्शन हरीराम-बेटे महेश के नाम पर, तीनों गिरफ्तार

Delhi Power Cut (कल का पावरकट 8 सितंबर 2026): पंजाबी बाग, वसंत कुंज, मंगोलपुरी सहित इन इलाकों में रहेगी बिजली गुल, देखें पूरा शेड्यूल

Delhi Power Cut (कल का पावरकट 8 सितंबर 2026): पंजाबी बाग, वसंत कुंज, मंगोलपुरी सहित इन इलाकों में रहेगी बिजली गुल, देखें पूरा शेड्यूल