(सांकेतिक फोटो)
जयपुर : आरजीएचएस (राजकीय स्वास्थ्य योजना) में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा गड़बड़ी के साथ-साथ आयुष पद्धति के तहत पंचकर्म में भी करोड़ों रुपए की धांधली का मामला सामने आया है। 2024-2025 के लिए अभ्यंग जैसे एक पंचकर्म के लिए 11 करोड़ रुपए का क्लेम किया गया, जबकि आरजीएचए भास्कर की जांच में पाया गया कि सभी प्रकार की पंचकर्म पद्धतियों का बजट दोगुना हो गया है।
जयपुर जिले में पिछले दो वर्षों में 17 नए पंचकर्म सेंटर खोले गए हैं। इस खुलासे के बाद, सरकार और चिकित्सा विभाग ने आरजीएचएस में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि आयुर्वेद चिकित्सा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए 20 नए उपचार पैकेज निर्धारित किए गए हैं।
अब से पंचकर्म सहित सभी आयुर्वेदिक उपचार केवल इन मान्य पैकेजों के अंतर्गत ही मान्य होंगे। इसके अलावा, अस्पतालों की ओर से की गई गड़बड़ी के कारण कई अस्पतालों को डीपैनल किया गया है और कुछ से रिकवरी की जा रही है। हालांकि, यह सवाल उठता है कि क्या सरकार अस्पतालों और मेडिकल स्टोर संचालकों से रिकवरी कर सकेगी। आईपीडी कंसल्टेशन के लिए 204-2025 में 60 लाख रुपए का क्लेम किया गया, जबकि कई मामलों में प्री एंड पोस्ट प्रोसिजर के लिए 2024-2025 में 1 करोड़ 10 लाख रुपए से अधिक का क्लेम किया गया है।