Jagannath Temple Ratna Bhandar: ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की सूची तैयार करने का दूसरा चरण बुधवार को शुरू हो गया। अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि सेवकों, रत्न विशेषज्ञ और सुनारों की एक चयनित टीम ने रत्न भंडार समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंदा पाधी के साथ पूर्वाह्न 11:30 बजे पवित्र रत्न भंडार में प्रवेश किया।
48 साल में पहली बार शुरू हुआ था काम
देवी-देवताओं के दैनिक इस्तेमाल के आभूषणों की सूची तैयार करने का काम 48 साल में पहली बार 25 मार्च को शुरू हुआ था। पाधी ने बताया, "पहले चरण में, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया को वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और 3डी मैपिंग के जरिए प्रलेखित किया गया। दैनिक उपयोग के आभूषणों की एक डिजिटल सूची तैयार की गई और उन्हें धातु के प्रकार के अनुसार वर्गीकृत करके अलग-अलग ’सिंधुकाओं’ (रत्न संदूकों) में रखा गया।"
1978 की लिस्ट के मुताबिक...
वर्तमान चरण बाहर रत्न भंडार पर केंद्रित है, जहां त्योहारों के आभूषण और गहने रखे जाते हैं। न्यायमूर्ति रथ ने कहा कि इस सूची में रथों और चार अन्य अवसरों पर प्रयुक्त प्रसिद्ध ’सुना भेष’ (स्वर्ण वस्त्र) आभूषण भी शामिल हैं। वर्ष 1978 की सूची के अनुसार, रत्न भंडार में 111 वस्तुएं हैं, जिनमें 78 सोने से मिश्रित वस्तुएं और 33 चांदी से मिश्रित वस्तुएं शामिल हैं। पाधी ने बताया कि यह सर्वेक्षण 11 अप्रैल तक जारी रहेगा, जिसके बाद 13 अप्रैल और 16 से 18 अप्रैल तक अगले सत्र होंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर के अनुष्ठान बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे और सुरक्षा कारणों से श्रद्धालु ’बाहर काठा’ (बाहरी बैरिकेड) से दर्शन कर सकेंगे।
पुरी जगन्नाथ मंदिर की मान्यता
बता दें कि, पुरी शहर का जगन्नाथ मंदिर, हिंदू धर्म के पवित्र चार धामों में से एक, भगवान कृष्ण (जगन्नाथ), बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है। यह स्थान अपनी अनूठी रथ यात्रा, आध्यात्मिक रहस्यों, और दिव्य महाप्रसाद के लिए प्रसिद्ध है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु 'जगत के स्वामी' के दर्शन के लिए आते हैं। गौरतलब है कि, पुरी जगन्नाथ रथयात्रा हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को आयोजित होने वाला एक भव्य हिंदू उत्सव है। इसमें भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों (नंदीघोष, तालध्वज, देवदलन) में सवार होकर गुंडिचा मंदिर (मौसी के घर) जाते हैं। यह 9 दिवसीय यात्रा दुनिया के सबसे पुराने रथ उत्सवों में से एक है।
(इनपुट - भाषा)
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