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CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी में अंग्रेजी को लेकर क्या है नियम, भारतीय भाषाओं की लिस्ट में इंग्लिश शामिल नहीं

अगर आप या आपके घर में कोई बच्चा CBSE बोर्ड में पढ़ता है, खासकर क्लास 8th या 9th में, तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। CBSE की नई तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस बीच जानेंगे कि इंग्लिश पढ़ने वाले छात्रों के लिए क्या हैं नियम?

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CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी में अंग्रेजी भाषा के नियम
Authored by: Kuldeep Raghav
Updated Jul 15, 2026, 10:30 IST

अगर आप या आपके घर में कोई बच्चा CBSE बोर्ड में पढ़ता है, खासकर क्लास 8th या 9th में, तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट में इस समय एक ऐसा मामला चल रहा है, जो आने वाले वर्षों में लाखों छात्रों की पढ़ाई का तरीका बदल सकता है। यह मामला है CBSE की नई तीन-भाषा नीति का, जिसे थ्री लैंग्वेज पॉलिसी कहा जा रहा है। अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस पॉलिसी के खिलाफ याचिकाएं डाली गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, गोपाल शंकरनारायणन और मुकुल रोहतगी ने इस पॉलिसी को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। अदालत में दलील दी गई कि इस नीति का उद्देश्य चाहे कितना भी अच्छा हो, लेकिन इसे लागू करने की तैयारी पूरी नहीं है। अदालत को यह भी बताया गया कि कई राज्यों में अभी तक नई भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, जिन भाषाओं को पढ़ाने की बात कही जा रही है, उनके शिक्षक भी बड़ी संख्या में मौजूद नहीं हैं। कई स्कूलों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर नई भाषा पढ़ानी है तो शिक्षक कहां से आएंगे?

एक तरफ सरकार और CBSE का कहना है कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी New Education Policy 2020 का हिस्सा है और इसका मकसद भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है। लेकिन दूसरी तरफ कई छात्र, पैरेंट्स और शिक्षा जगत से जुड़े लोग इस पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कहा जा रहा है कि सीबीएसई ने इस पॉलिसी को जिस तरह अचानक लागू किया, उससे स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इस पॉलिसी का विरोध करने वालों का कहना है कि देशभर के सभी स्कूलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। मेट्रो शहरों के निजी स्कूलों और छोटे कस्बों या ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में संसाधनों का बड़ा अंतर है। अगर किसी स्कूल में पंजाबी, तमिल, कन्नड़, मलयालम, असमिया या दूसरी भारतीय भाषा पढ़ाने वाला शिक्षक ही नहीं है, तो छात्र उस भाषा को सीखेंगे कैसे?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुनवाई के दौरान एक उदाहरण भी दिया गया। कहा गया कि अगर कोई छात्र अभी तक अंग्रेजी और फ्रेंच पढ़ रहा था, तो अब उसे अचानक तमिल या किसी दूसरी भारतीय भाषा को पढ़ने के लिए कहा जा रहा है। यह भी कहा गया कि 9th क्लास के छात्र पहले ही बोर्ड की तैयारी शुरू कर देते हैं। ऐसे में नई भाषा जोड़ने का मतलब छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डालना होगा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव शिक्षा के अधिकार यानी RTE Act की भावना के खिलाफ है, क्योंकि छात्रों और अभिभावकों को पर्याप्त विकल्प नहीं दिए गए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने तमाम दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार, CBSE और NCERT को नोटिस जारी करते हुए 10 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

क्या है सीबीएसई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी

CBSE ने 1 जुलाई 2026 से नई भाषा नीति लागू की है, जिसके तहत 9th क्लास में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया है। इन तीन भाषाओं को R1, R2 और R3 का नाम दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण शर्त ये है कि इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। यह भारतीय भाषाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से कोई दो हो सकती हैं। सीबीएसई ने 29 जून को एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें इस लैंग्वेज पॉलिसी को विस्तार से बताया गया है। Check CBSE 3 Language Policy Circular PDF

ये 22 भाषाएं कौन सी हैं?

  • असमिया
  • बंगाली
  • बोडो
  • डोगरी
  • गुजराती
  • हिंदी
  • कन्नड़
  • कश्मीरी
  • कोंकणी
  • मैथिली
  • मलयालम
  • मणिपुरी
  • मराठी
  • नेपाली
  • उड़िया
  • पंजाबी
  • संस्कृत
  • संथाली
  • सिंधी
  • तमिल
  • तेलुगू
  • उर्दू

22 भाषाओं में अंग्रेजी नहीं

सीबीएसई से संबद्ध महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) के प्रधानाचार्य नरेंद्र मित्तल का कहना है कि इन 22 भाषाओं में अंग्रेजी शामिल नहीं है। ऐसे में अंग्रेजी पढ़ने वाले छात्रों के सामने क्या विकल्प हैं? अगर कोई छात्र पहले से भारतीय भाषा के रूप में हिंदी और तमिल पढ़ रहा है, तो तीसरी भाषा के रूप में उसे अंग्रेजी भाषा चुननी होगी। इसी तरह कोई छात्र पहले से तमिल और अंग्रेजी पढ़ रहा है, तो तीसरी भाषा भारतीय भाषा चुननी होगी। और अगर कोई छात्र इंग्लिश के साथ फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश या जापानी जैसी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो उसे अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुना जा सकता है।

सीबीएसई की तीन भाषा नीति

सीबीएसई की तीन भाषा नीति

चूंकि R1, R2, R3 और चौथी अतिरिक्त भाषा (विदेशी भाषा) का नियम थोड़ा जटिल है, इसलिए इस फ्लोचार्ट की मदद से समझिए-

  • विकल्प A: हिंदी (भारतीय) + तमिल (भारतीय) + अंग्रेजी (गैर-भारतीय) = वैध (Valid)
  • विकल्प B: अंग्रेजी (गैर-भारतीय) + फ्रेंच (विदेशी) + हिंदी (भारतीय) = अवैध (Invalid - क्योंकि कम से कम 2 भारतीय भाषाएं जरूरी हैं)

9वीं और 10वीं के लिए क्या है नियम

हालांकि, सीबीएसई ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर दसवीं कक्षा के छात्रों को राहत दी है। बोर्ड का कहना है कि सत्र 2027-28 से 10वीं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, लेकिन छात्रों को स्कूल लेवल पर होने वाले असेसमेंट में पास होना अनिवार्य होगा। यदि छात्र इस असेसमेंट में पास नहीं होते हैं, तो उन्हें कक्षा 10वीं का पास सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। कक्षा 10वीं में पास सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए उन्हें दोबारा असेसमेंट देना होगा और उसे क्लियर करना होगा। इसी तरह अगर छात्र क्लास 9th में तीसरी भाषा के असेसमेंट में फेल होगा, तो उसे 10वीं क्लास में प्रमोट तो कर दिया जाएगा, लेकिन 10वीं की पढ़ाई के साथ उसे 9वीं का असेसमेंट क्लियर करना होगा।

क्या है CBSE का तर्क

CBSE का कहना है कि यह पूरी तरह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है। बोर्ड का दावा है कि 28,848 स्कूलों में से 47.3 फीसदी स्कूल पहले से ही कक्षा 9 में दो या उससे अधिक भारतीय भाषाएं पढ़ा रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में कम से कम एक भारतीय भाषा के टीचर पहले से मौजूद हैं। इसलिए बोर्ड का मानना है कि यह बदलाव पूरी तरह संभव है। साथ ही बोर्ड का कहना है कि विदेशी भाषाओं को हटाया नहीं गया है, बल्कि भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी गई है।

सीबीएसई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी

सीबीएसई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान यह माना कि कानूनी पहलू के साथ-साथ लॉजिस्टिक यानी व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विचार करना जरूरी है। फिलहाल केंद्र सरकार, CBSE और NCERT को अपना जवाब दाखिल करना है। 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले पर दोबारा सुनवाई करेगा। संभव है कि अदालत उस दिन यह तय करे कि मौजूदा व्यवस्था में किसी बदलाव की जरूरत है या नहीं, या फिर CBSE को और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। अब देखना होगा कि 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाता है, क्योंकि उसका फैसला आने वाले वर्षों में CBSE के भाषा पाठ्यक्रम की दिशा तय कर सकता है।

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