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अगर स्थानीय पार्षद की सुन ली होती तो इंदौर कांड न होता! नवंबर 2024 में ही लिखा जा चुका था पत्र

Indore water contamination: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी आपूर्ति के मामले ने बड़ा रूप ले लिया है। नर्मदा पाइपलाइन में ड्रेनेज का पानी मिल जाने से गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया, और अबतक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में अब नगर निगम अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है।

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इंदौर में दूषित जल की जानकारी अधिकारियों को काफी पहले से थी

Indore water contamination: इंदौर दूषित पानी मामले में अब एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। अब जो जानकारी सामने आई है, उसमें सीधे-सीधे तौर पर आधिकरियों की लापरवाही दिख रही है। अधिकारियों और सरकार को पाइप लाइन खराब होने की जानकारी पहले से थी, लेकिन सही समय पर कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला इस मुद्दे को लेकर नवंबर 2024 में ही सीएम मोहन यादव को चिट्ठी लिख चुके थे, लेकिन किसी ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया। नगर निगम के अधियारियों ने इस पत्र की अनदेखी की।

टेंडर आया लेकिन लटका रहा

इसके बाद जब स्थानीय पार्षद की ओर से दवाब डाला गया तो 30 जुलाई 2025 को पाइप बदलने के लिए टेंडर जारी किया गया, लेकिन काम नहीं हुआ। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि यह टेंडर समय पर खोला ही नहीं गया और लगभग 100 दिन बाद 29 दिसंबर शाम 4:30 बजे खोला गया। बताया जा रहा है कि निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया द्वारा भी टेंडर समय पर नहीं खोला गया, जिससे कार्य लंबित पड़ता चला गया।

7 कंपनियों की भागीदारी

यह टेंडर करीब 2.40 करोड़ रुपए का था। सात कंपनियों ने इसमें भाग लिया था, जिनमें से एक कंपनी का टेंडर रिजेक्ट हो गया। महत्वपूर्ण यह कि सभी कंपनियाँ 15 सितंबर तक टेंडर जमा कर चुकी थीं, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।

समय पर कार्रवाई होती तो टल सकती थी त्रासदी?

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि अगर टेंडर समय पर खोला जाता और पाइपलाइन समय रहते बदल दी जाती, तो शायद आज की स्थिति नहीं बनती। 15 लोगों की मौतें और बड़ी संख्या में लोग बीमार होने की नौबत नहीं आती।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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