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Expired Medicines: घर में रखी पुरानी दवाएं कब बन जाती हैं खतरा? सिर्फ एक्सपायरी डेट नहीं, ये बातें भी जानना जरूरी

Expired Medicines: घर में रखीं दवाएं हमारी सेहत ठीक करती हैं, लेकिन एक्सपायर्ड दवाएं सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। आज हम आपको बताएंगे कि एक्सपायर होने के बाद कौन सी दवाओं का असर कम हो जाता है और कौन सी खतरनाक हो जाती है?

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दवाओं की एक्सपायरी डेट का पूरा सच

Expired Medicines: क्या आपने कभी सिरदर्द या बुखार की पुरानी दवा सिर्फ इसलिए खा ली कि उसकी स्ट्रिप सही दिख रही थी? अगर हां, तो यह आदत आपके लिए जोखिम भरी हो सकती है। हालांकि हर एक्सपायर्ड दवा जहरीली नहीं होती, लेकिन कई दवाएं समय के साथ अपना असर खो देती हैं, जबकि कुछ दवाओं में संक्रमण या गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है। शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन, डॉ. श्रेय श्रीवास्तव का कहना है कि एक्सपायरी डेट को केवल 'औपचारिक तारीख' समझना सबसे बड़ी गलती है। किसी दवा की सुरक्षा सिर्फ उसकी एक्सपायरी पर नहीं, बल्कि यह भी निर्भर करती है कि उसे कैसे रखा गया, कब खोला गया और किस रूप (टैबलेट, सिरप, इंजेक्शन या आई ड्रॉप) में वह उपलब्ध है। आइए विस्तार से जानते हैं दवाओं के पैकेट पर लिखे एक्सपायरी (Medicine Safety Tips) डेट के बारे में...

एक्सपायरी डेट का असली मतलब क्या है

अमेरिकी Food and Drug Administration (FDA) और दवा निर्माण मानकों के अनुसार, Expiry Date वह समय-सीमा है, जिसके भीतर निर्माता यह भरोसा देता है कि सही परिस्थितियों में रखी गई दवा अपनी गुणवत्ता, प्रभाव (Potency) और सुरक्षा बनाए रखेगी। इस तारीख के बाद दवा का सक्रिय रसायन धीरे-धीरे टूटने लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर दवा तुरंत जहरीली हो जाती है, बल्कि अधिकतर मामलों में उसका इलाज करने का असर कम हो जाता है।

एक्सपायरी डेट और Beyond-Use Date (BUD) में क्या अंतर है

आमतौर पर लोगों को यहीं सबसे ज्यादा भ्रम होता है। क्योंकि कुछ दवाओं के पैकेट पर एक्सपायरी डेट और कुछ पर Beyond-Use Date (BUD) लिखा होता है। तो आपको बता दें कि Expiry Date वह तारीख है जो कंपनी सीलबंद पैक के लिए तय करती है। जबकि Beyond-Use Date (BUD) वह समय है, जब दवा को खोलने के बाद उसे इस्तेमाल करना सुरक्षित माना जाता है।

उदाहरण से समझिए

आई ड्रॉप की बोतल पर एक्सपायरी 2027 लिखी हो सकती है। लेकिन अगर आपने उसे आज खोला है, तो अधिकांश मल्टी-डोज आई ड्रॉप्स को लगभग 28 दिन के भीतर इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इसके बाद बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। यही नियम कई सिरप, ड्राई सिरप और कुछ लिक्विड दवाओं पर भी लागू होता है। याद रखें 'बोतल की एक्सपायरी' और 'बोतल खोलने के बाद की सुरक्षित अवधि' दोनों अलग-अलग बातें हैं।

टैबलेट और सिरप में सबसे बड़ा अंतर क्या है

डॉ. श्रेय श्रीवास्तव, के अनुसार दवा का असर सिर्फ उसकी एक्सपायरी डेट पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह किस रूप में उपलब्ध है। उदाहरण के लिए टैबलेट और कैप्सूल आमतौर पर ब्लिस्टर स्ट्रिप में सीलबंद रहते हैं, जिससे वे हवा और नमी के सीधे संपर्क में नहीं आते हैं। इसलिए सही तरीके से स्टोर किए जाने पर ये अपेक्षाकृत अधिक स्थिर रहते हैं और एक्सपायरी के बाद भी इनमें सबसे पहले असर कम होने की समस्या देखने को मिलती है।

इसके अलावा लिक्विड सिरप की बोतल एक बार खुलने के बाद उसके भीतर हवा प्रवेश कर जाती है। समय के साथ प्रिजर्वेटिव कमजोर पड़ सकते हैं और बैक्टीरिया या फंगस के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि आई ड्रॉप जैसी दवाओं में और भी ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि आंख शरीर का अत्यंत संवेदनशील अंग है और दूषित आई ड्रॉप गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है।

क्या कोई दवा सच में जहरीली हो सकती है

डॉ. श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं कि, दवाओं की एक्सपायरी डेट के मामले में यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है। तो इसका एक लाइन में उत्तर है- बहुत कम मामलों में। जी हां 1960-70 के दशक में पुराने Tetracycline फॉर्मूलेशन के खराब होने पर किडनी को नुकसान पहुंचाने के कुछ मामले मेडिकल साहित्य में दर्ज किए गए थे। लेकिन आधुनिक निर्माण तकनीक और नए फॉर्मूलेशन में यह समस्या सामान्य रूप से नहीं मानी जाती है।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि एक्सपायर्ड एंटीबायोटिक सुरक्षित हो गई। एक्सपर्ट्स आज भी सलाह देते हैं कि किसी भी एक्सपायर्ड एंटीबायोटिक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण ठीक से नियंत्रित नहीं हो सकता और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ने का खतरा रहता है।

कौन-सी दवाएं सबसे ज्यादा खतरनाक हैं

जोखिम स्तरउदाहरणएक्सपायरी या लंबे समय बाद क्या हो सकता है?क्या करें?
Critical Riskइंसुलिन, नाइट्रोग्लिसरीन, एपिनेफ्रीनअसर थोड़ा भी कम हुआ तो जानलेवा स्थिति बन सकती हैतुरंत बदलें, उपयोग न करें
High Microbial Riskआई ड्रॉप, ईयर ड्रॉप, बच्चों के सिरप, ड्राई सिरपबैक्टीरिया या फंगस बढ़ सकते हैंखोलने के बाद निर्धारित समय के भीतर ही उपयोग करें
Reduced Effectivenessपैरासिटामोल, एंटासिड, विटामिन, एलर्जी की दवाएंदवा अपेक्षित असर नहीं करेगीनई दवा लेना बेहतर है
Prescription Medicinesबीपी, थायरॉयड, अस्थमा, हार्ट मेडिसिनबीमारी नियंत्रण से बाहर जा सकती हैडॉक्टर की सलाह के बिना उपयोग न करें

किन दवाओं में सबसे ज्यादा सावधानी रखें?

इंसुलिन

तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होती है। फ्रिज से बाहर लंबे समय तक रखने या एक्सपायरी के बाद इसका असर कम हो सकता है।

नाइट्रोग्लिसरीन

हवा और नमी के संपर्क में आते ही इसकी क्षमता तेजी से घट सकती है।

आई ड्रॉप

एक बार खुलने के बाद निर्धारित समय के बाद उपयोग न करें।

इंजेक्शन

एक्सपायर्ड इंजेक्शन का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए।

एंटीबायोटिक

बची हुई या एक्सपायर्ड एंटीबायोटिक भविष्य में बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए।

घर में दवाएं कहां और कैसे रखें?

अधिकांश लोग दवाओं को रसोई, बाथरूम या कार में रख देते हैं, जबकि ये स्थान दवाओं के लिए सबसे अनुपयुक्त माने जाते हैं। इन जगहों पर नमी, भाप, गर्मी और तापमान में लगातार बदलाव होता रहता है, जिससे दवाओं की गुणवत्ता एक्सपायरी डेट से पहले ही प्रभावित हो सकती है। इसलिए दवाओं को हमेशा ठंडी, सूखी और सीधी धूप से दूर जगह पर रखना चाहिए। उन्हें मूल पैकिंग में ही रखें ताकि उनकी एक्सपायरी और बैच नंबर सुरक्षित रहें। यदि कोई सिरप या आई ड्रॉप खोलते हैं, तो उस पर खोलने की तारीख लिख देना एक अच्छी आदत है। साथ ही, केवल उन्हीं दवाओं को फ्रिज में रखें, जिनके लिए निर्माता या डॉक्टर ने ऐसा करने की सलाह दी हो।

'होम मेडिसिन ऑडिट' जरूर करें

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि साल में कम से कम दो बार घर की फर्स्ट-एड बॉक्स की जांच करें। इसे चेक करने के लिए आप कुछ सिंपल स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं-

  • कौन-सी दवा एक्सपायर हो चुकी है?
  • कौन-सी बोतल महीनों पहले खुली थी?
  • किस दवा का रंग, गंध या बनावट बदल गई है?
  • बिना लेबल वाली दवा तो नहीं रखी?

भारत में एक्सपायर्ड दवाओं को फेंकने का सही तरीका क्या है

भारत में हर जगह Medicine Take-Back Program उपलब्ध नहीं है। ऐसे में विशेषज्ञ कुछ सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं।

  • दवाओं को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।
  • एंटीबायोटिक, हार्मोनल दवाएं या अन्य दवाएं सिंक या टॉयलेट में फ्लश न करें, क्योंकि इससे पर्यावरण और जल स्रोत प्रभावित हो सकते हैं।
  • यदि स्थानीय नियम अनुमति देते हों और दवा के विशेष निपटान के निर्देश न हों, तो टैबलेट को कूटकर इस्तेमाल की हुई चायपत्ती, मिट्टी या अन्य अनुपयोगी सामग्री में मिलाकर बंद पैकेट में डालकर फेंकें, ताकि कोई व्यक्ति या जानवर गलती से उसका उपयोग न कर सके।
  • दवा की पैकिंग पर मौजूद व्यक्तिगत जानकारी हटाकर ही उसे नष्ट करें।
  • यदि आपके शहर में अस्पताल, फार्मेसी या स्थानीय प्रशासन दवा संग्रह (Take-Back) की सुविधा देता है, तो उसी का उपयोग करें।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. श्रेय श्रीवास्तव, का मानना है कि एक्सपायर्ड दवा का सबसे बड़ा खतरा 'जहर' बन जाना नहीं, बल्कि बीमारी का सही इलाज न कर पाना है। विशेष रूप से हार्ट, डायबिटीज, अस्थमा, संक्रमण और आंखों से जुड़ी दवाओं में थोड़ी भी प्रभावशीलता कम होना गंभीर परिणाम दे सकता है। इसलिए ऐसी दवाओं में एक्सपायरी और स्टोरेज दोनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी एक्सपायर्ड दवा का उपयोग करने, बंद करने या बदलने का निर्णय अपने चिकित्सक या पंजीकृत फार्मासिस्ट की सलाह के अनुसार ही लें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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