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भारत में कहां बनेंगे Rafale Jet ! जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की हवा निकाल दी थी

भारतीय वायुसेना के लिए प्रस्तावित 114 राफेल फाइटर जेट सौदे में लगभग 80 फीसद विमान भारत में बनाए जाने की योजना पर विचार हो रहा है। भारत-फ्रांस बातचीत में अधिकतम लोकलाइजेशन और MRO सुविधा पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में अगर भारत में Rafale बनाए जाते हैं तो जानिए, वह कौन सा शहर होगा, जहां इनका निर्माण होगा।

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राफेल जेट

राफेल भारतीय वायु सेना की शान हैं। राफेल ने पिछले साल Operation Sindoor के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया था। भारत के राफेल से पाकिस्तान ही नहीं चीन भी कांपता है। अब राफेल को लेकर एक बड़ी और खुश कर देने वाली खबर है। भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर अहम संकेत मिला है। खबरों के मुताबिक प्रस्तावित समझौते के तहत लगभग 80 फीसद राफेल फाइटर जेट भारत में ही निर्मित किए जाने की योजना है। चलिए जानते हैं इस बारे में विस्तार से -

भारत में बनेंगे राफेल

राफेल लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के लिए काफी अहम और मुख्य हथियार है। राफेल के कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को फ्रांस से भारत ट्रांसफर किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। इससे देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलने के साथ ही बड़ी मात्रा में रोजगार भी पैदा होंगे और रक्षा निर्यात बढ़ने की भी उम्मीद की जा सकती है।

सरकारी सूत्रों के हवाले से ANI ने बताया है कि भारत और फ्रांस के अधिकारियों के बीच इस सौदे में अधिकतम स्थानीयकरण (लोकलाइजेशन) को लेकर बातचीत चल रही है। योजना के तहत भारत में एक अत्याधुनिक मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि राफेल विमानों की सर्विसेबिलिटी और ऑपरेशनल तैयारियों में और सुधार हो सके।

भारत में कहां बनेंगे राफेल!

अगर राफेल फाइटर जेट्स को भारत में बनाने पर सहमति बन जाती है तो पहला प्रश्न यही उठता है कि भारत में राफेल कहां बनेंगे? इसका उत्तर फिलहाल सीधा-सपाट तो नहीं है। लेकिन महाराष्ट्र के नागपुर में राफेल का MRO (Maintenance, Repair & Overhaul) केंद्र है। यहीं पर भविष्य में राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण हो सकता है। फ्रांस की Dassault Aviation और भारत के Reliance समूह की जॉइंट वेंचर DRAL (Dassault Reliance Aerospace Limited) Rafale के पुर्जों का निर्माण और मेंटेनेंस करती है। भविष्य में अगर भारतीय वायुसेना (IAF) या नौसेना अतिरिक्त की तरफ से Rafale का बड़ा ऑर्डर मिलता है तो Rafale का आंशिक या पूर्ण निर्माण भारत में शुरू किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में निर्माण नागपुर में किया जा सकता है। इसके अलावा हैदराबाद भी एक जगह है, जहां पर औद्योगिक ढांचा मौजूद है और वहां पर राफेल फाइटर जेट्स का निर्माण हो सकता है।

निर्यात ऑर्डर भी होंगे पूरे!

खबरों के मुताबिक सौदे की कुल लागत को लेकर भी दोनों देशों के बीच अभी चर्चा जारी है। फ्रांसीसी पक्ष के मूल्य प्रस्ताव में लगभग चार प्रतिशत वार्षिक महंगाई दर को शामिल किया गया है। चूंकि, राफेल के कई प्रमुख कंपोनेंट और सिस्टम भारत में बनने का प्रस्ताव है, ऐसे में यह संभावना भी है कि फ्रांस की रक्षा कंपनी डसॉल्ट एविएशन भविष्य के निर्यात ऑर्डरों के लिए भारतीय साझेदारों का इस्तेमाल करे। इससे भारत का रक्षा निर्यात बढ़ेगा।

अमेरिकी F35 से बेहतर सर्विसेबिलिटी

भारत को राफेल और अन्य डसॉल्ट विमानों के लिए एक क्षेत्रीय MRO हब के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे न सिर्फ आत्मनिर्भरता बढ़ेगी बल्कि रक्षा निर्यात को भी गति मिलेगी। रणनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो राफेल को भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विमान माना गया है। इसकी सर्विसेबिलिटी लगभग 90 प्रतिशत है, जो वैश्विक स्तर पर अन्य लड़ाकू विमानों, यहां तक कि अमेरिकी एफ-35 से भी बेहतर मानी जाती है।

लगातार बढ़ रही भारत की रक्षा चुनौतियां

भारतीय वायुसेना लंबे समय से 114 राफेल जेट की खरीद की मांग कर रही है, क्योंकि फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या लगातार घट रही है। स्वदेशी कार्यक्रमों में इंजन और सिस्टम इंटीग्रेशन से जुड़ी देरी ने इस संकट को और गहरा किया है। पाकिस्तान और चीन के साथ सक्रिय मोर्चों के बीच, और बांग्लादेश को उभरती सुरक्षा चुनौती के रूप में देखते हुए, IAF के लिए 42 स्क्वाड्रनों के पारंपरिक मानक से भी ज्यादा विमानों की जरूरत महसूस की जा रही है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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