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एक मरीज और 7 हजार मौतें: 100 साल पहले शिमला से दिल्ली पहुंचे शख्स ने कैसे फैलाई थी तबाही?

Delhi 1918 Flu History: दिल्ली अभिलेखागार से मिले ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, 1918 में फैली स्पैनिश फ्लू महामारी की शुरुआत दिल्ली में शिमला से आए एक बीमार यूरोपीय नागरिक से हुई थी। कुछ ही महीनों में इस बीमारी ने शहर के 7,044 और ग्रामीण इलाकों के 16,131 लोगों की जान ले ली।

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100 साल पहले दिल्ली में मचा था हाहाकार (फोटो: एआई इमेज)

Delhi 1918 Flu History: आज भले ही हम किसी भी वायरस के प्रसार को ट्रैक करने के लिए डिजिटल निगरानी और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सदी भर पहले दिल्ली में महामारी से निपटने के नियम बिल्कुल अलग थे। दिल्ली अभिलेखागार से मिले 1918 के ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि कैसे शिमला से दिल्ली आए सिर्फ एक बीमार यूरोपीय व्यक्ति से शहर में इन्फ्लुएंजा (स्पैनिश फ्लू) महामारी की शुरुआत हुई थी और देखते ही देखते इसने हजारों जिंदगियों को लील लिया था।

साल 1918 की चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने शहर में इन्फ्लुएंजा के पहले मामले की पहचान एक यूरोपीय नागरिक के रूप में की थी। वह व्यक्ति शिमला (तब सिमला) से दिल्ली पहुंचा था, जहां उसके परिवार के लोग पहले से ही इस अज्ञात बुखार से पीड़ित थे। उसके दिल्ली आने के महज एक हफ्ते बाद, उसी घर में रहने वाला एक अन्य व्यक्ति भी इस संक्रमण की चपेट में आ गया।

इस महामारी से 23,175 लोगों की हुई थी मौत

शुरुआत में यानी सितंबर 1918 के दौरान किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं जताई गई थी। मरीजों को सिर्फ सामान्य बुखार, खांसी और गले में खराश की शिकायत थी। लेकिन अक्टूबर का महीना आते-आते यह बीमारी अचानक बेहद आक्रामक और जानलेवा हो गई। सरकारी अभिलेखागार के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर और नवंबर 1918 के महज दो महीनों के भीतर दिल्ली प्रांत में इस महामारी से 23,175 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।

1920 में आधिकारिक रूप से इन्फ्लुएंजा को माना गया 'अधिसूचित संक्रामक रोग'

’पीटीआई’ को दिल्ली अभिलेखागार से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, इनमें से 7,044 मौत दिल्ली शहर में और 16,131 मौत ग्रामीण इलाकों में हुई थीं। वर्ष 1918-19 की इन्फ्लुएंजा महामारी भारत के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाओं में से एक थी। इस भयानक त्रासदी ने ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया। इसके दो साल बाद, सितंबर 1920 में ब्रिटिश भारत प्रशासन ने इन्फ्लुएंजा को आधिकारिक रूप से 'अधिसूचित संक्रामक रोग' (Notified Infectious Disease) घोषित किया।

उस समय दिल्ली का स्थानीय प्रशासन 'पंजाब नगरपालिका अधिनियम' के तहत चलता था, इसलिए इस कानून के तहत नगर पालिका को महामारी नियंत्रण के विशेष प्रशासनिक और कानूनी अधिकार दिए गए। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के दौर में H1N1 या मौसमी इन्फ्लुएंजा के हर मामले की अलग से रिपोर्टिंग अनिवार्य नहीं है, लेकिन 1918-19 की महामारी ने आधुनिक भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे की नींव रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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