IMD July Forecast:IMD July Forecast:IMD July Forecast: देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। हालांकि, अब भी दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब आदि उत्तर भारत के ज्यादा राज्यों में मानसून ने दस्तक नहीं है। अगले 48 घंटे में मानसून राजस्थान पहुंच सकता है, जो सब कुछ ठीक रहा तो 8 दिन की देरी से पहुंचेगा। मानसून पहुंचने के बाद भी राहत की फुहारें नहीं पड़ रही हैं। जून महीने में ही देशभर में 40 फीसद कम बारिश हुई है। पिछले 126 वर्षों में जून 2026 पांचवा सबसे कम बारिश वाला जून का महीना रहा। अब आज से जुलाई का महीना शुरू हो गया है। जुलाई में बारिश को लेकर लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन Monsoon की रफ्तार जुलाई में भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने वाली है।
इस महीने भी बारिश सामान्य से कम होगी?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए जारी मासिक पूर्वानुमान में कहा है कि पूरे देश में औसत मासिक वर्षा सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है। 1971-2020 के दीर्घकालिक औसत (LPA) के मुताबिक जुलाई में देशभर में सामान्य बारिश 280.4 मिमी मानी जाती है, लेकिन इस बार अधिकांश हिस्सों में इससे कम ही बारिश होने का अनुमान है।
सामान्य के कम बारिश कहां होगी?
IMD के अनुसार जुलाई में सबसे कम बारिश का असर देश के बड़े हिस्से में देखने को मिल सकता है। खासकर मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के अधिकांश इलाकों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है।
यहां होगी सामान्य से ज्यादा बारिश!
IMD के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
पेयजल संकट और सूखे के हालात बन सकते हैं
मौसम विभाग ने आगाह किया है कि सामान्य से कम बारिश का असर खेती, जलाशयों के जलस्तर, पेयजल उपलब्धता और पनबिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। बारिश कम होने से कई राज्यों में जल संकट और सूखे जैसी परिस्थितियां बनने का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे में जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और कृषि संबंधी वैकल्पिक योजनाओं पर समय रहते काम करने की जरूरत बताई गई है।

IMD ने बताया कहां कितनी बारिश होगी (Photo - IMD)
बारिश कम, तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा!
बारिश तो कम होगी ही, जुलाई के तापमान को लेकर भी राहत के संकेत नहीं हैं। आईएमडी का अनुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है। सिर्फ पश्चिम-मध्य भारत के कुछ अलग-थलग क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य या उससे कम रहने की संभावना है, जबकि मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।
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अल-नीनो का असर व्यापक होगा
मौसम विभाग ने इसके पीछे प्रशांत महासागर में बने कमजोर 'अल-नीनो' प्रभाव को भी एक प्रमुख कारण माना है। विभाग के जलवायु मॉडल संकेत दे रहे हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अल-नीनो और मजबूत हो सकता है। हिंद महासागर में फिलहाल न्यूट्रल इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति बनी हुई है, जिसके पूरे मानसून सीजन तक बने रहने की संभावना है।
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IMD ने दी सतर्क रहने की सलाह
IMD ने कहा है कि जुलाई के अंत में अगस्त और सितंबर यानी मानसून सीजन के दूसरे चरण का पूर्वानुमान भी जारी किया जाएगा। फिलहाल राज्यों और संबंधित एजेंसियों को जल प्रबंधन, कृषि और आपदा तैयारी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है, ताकि कम बारिश की संभावित स्थिति से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
