गुरुग्राम

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बनी नूंह की ये पंचायत, 14 मुस्लिम पंचायत सदस्यों ने इकलौती हिंदू महिला को चुना सरपंच

हरियाणा की मुस्लिम बहुल सिरोली ग्राम पंचायत की 14 मुस्लिम सदस्यों ने इकलौती हिंदू महिला निशा चौहान को अपना सरपंच चुना। यहां पंचायत चुनाव दिसंबर 2022 में हुआ था। हालांकि, विजयी उम्मीदवार सहाना को कुछ महीने बाद बर्खास्त कर दिया गया, क्योंकि उनके शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। नवनिर्वाचित सरपंच ने कहा कि उनकी जीत हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

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निशा चौहा, सरपंच, सिरोली ग्राम पंचायत

नूंह : जिले के मुस्लिम बहुल सिरोली गांव ने अपनी एकमात्र हिंदू पंचायत सदस्य को सरपंच चुना है। तीस वर्षीय निशा चौहान दो अप्रैल को सिरोली की सरपंच चुनी गईं। एक वरिष्ठ पंचायत अधिकारी के अनुसार, पुनाहाना प्रखंड के अंतर्गत सिरोली पंचायत में 15 सदस्य हैं, जिनमें से 14 मुस्लिम हैं और आठ महिलाएं हैं। सिरोली सरपंच का पद महिलाओं के लिए आरक्षित है। गांव के 3,296 मतदाताओं में केवल 250 हिंदू हैं। इनमें से निशा चौहान इकलौती महिला सदस्य हैं।

विजयी उम्मीदवार सहाना बर्दाश्त

पंचायत अधिकारी नसीम के अनुसार, पंचायत चुनाव दिसंबर 2022 में हुआ था। हालांकि, विजयी उम्मीदवार सहाना को कुछ महीने बाद बर्खास्त कर दिया गया, क्योंकि उनके शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। नवनिर्वाचित सरपंच ने कहा कि उनकी जीत हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। लोग यहां सौहार्द बनाकर रहते हैं। यही कारण है 14 मुस्लिम महिला पंचायत सदस्यों के बीच इकलौती हिंदू महिला सदस्य को बड़े पद पर आसीन किया।

हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल है गांव

चौहान ने कहा, ‘‘मेरा गांव मुस्लिम बहुल है, लेकिन हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की पुरानी परंपरा अब भी यहां कायम है। सही मायने में मेवात क्षेत्र में कोई धार्मिक भेदभाव नहीं है, जिसका जीता जागता उदाहरण मेरा सरपंच के रूप में चुना जाना है। मेरी जीत पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक भाईचारे का संदेश है।सिरोली के पूर्व सरपंच और वर्तमान वार्ड सदस्य अशरफ ने कहा कि पंचों ने बेहतर प्रशासन की उम्मीद में चौहान को चुना है। अशरफ ने कहा, "यहां हिंदू और मुसलमान सद्भावना से रहते हैं। हम एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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