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इतने बायोकैमिकल और कॉलीफॉर्म के बाद क्या Hindon को नदी कहना सही है? Greater Noida में सबसे खराब हालात

ग्रेटर नोएडा के कुलेसरा में हिंडन नदी का प्रदूषण स्तर बहुत ही ज्यादा चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया है। यहां BOD 82 और 92 लाख कॉलीफॉर्म के आंकड़े नदी के पानी की खराब स्थिति और बढ़ते प्रदूषण को सामने लाते हैं।

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ग्रेटर नोएडा में हिंडन नदी की स्थिति दयनीय

Greater Noida में हिंडन नदी का पानी प्रदूषण के ऐसे स्तर पर पहुंच गया है, जिसके बाद मन में प्रश्न आता है कि क्या हिंडन को नदी कहना सही है? क्योंकि प्रदूषण का यह स्तर नदी के अस्तित्व और आसपास रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की रिपोर्ट में ग्रेटर नोएडा के कुलेसरा क्षेत्र में हिंडन का BOD स्तर 82 और टोटल कॉलीफॉर्म 92 लाख प्रति 100 मिलीलीटर दर्ज किया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हिंडन के पानी की जांच के आंकड़ों में कुलेसरा की स्थिति सबसे खराब दिखाई देती है।

हालात इसलिए भी चिंताजनक हैं, क्योंकि गौतमबुद्ध नगर से लगभग 22 एमएलडी गंदा पानी हिंडन में पहुंचने की बात सामने आई है। Hindon में लगातार गंदा पानी गिरने से नदी की जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पानी में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा हो चुका है, तो क्या हिंडन को महज कागजों पर नदी कहना पर्याप्त है?

BOD बढ़ने का मतलब क्या?

BOD यानी Biochemical Oxygen Demand, पानी में मौजूद जैविक पदार्थों को डिकंपोज करने के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा जरूरी ऑक्सीजन की मात्रा को दर्शाता है। BOD जितना अधिक होता है, पानी में उपलब्ध घुलित ऑक्सीजन उतनी ही कम हो सकती है। इससे जलीय जीवों के लिए परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाती हैं।

यही वजह है कि हिंडन में बढ़ता BOD सिर्फ पानी की गुणवत्ता का आंकड़ा नहीं, बल्कि नदी के पारिस्थितिक तंत्र पर बढ़ते दबाव का संकेत भी है।

कुलेसरा में सबसे ज्यादा प्रदूषण

UPPCB के आंकड़ों के मुताबिक हिंडन नदी के अलग-अलग स्थानों पर BOD और टोटल कॉलीफॉर्म की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। कुलेसरा में BOD 82 दर्ज किया गया, जबकि टोटल कॉलीफॉर्म का स्तर 92 लाख प्रति 100 मिलीलीटर तक पहुंच गया।

तुलना करें तो सहारनपुर में BOD 36 और कॉलीफॉर्म 58 हजार, बागपत में BOD 62 और कॉलीफॉर्म 2.1 लाख, मेरठ में BOD 68 और कॉलीफॉर्म 2.2 लाख तथा गाजियाबाद में BOD 58 और कॉलीफॉर्म 7.9 लाख दर्ज किया गया। छिजारसी में BOD 50 और कॉलीफॉर्म 7 लाख रहा।

92 लाख कॉलीफॉर्म क्यों चिंताजनक?

कुलेसरा में 92 लाख प्रति 100 मिलीलीटर टोटल कॉलीफॉर्म का आंकड़ा पानी में भारी जैविक प्रदूषण की ओर इशारा करता है। ऐसे बैक्टीरियल प्रदूषण का बढ़ा स्तर यह संकेत दे सकता है कि घरेलू सीवेज और अन-ट्रीटेड गंदे पानी का प्रभाव नदी पर पड़ रहा है। नदी के पानी का सीधे इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह खासतौर पर चिंता का विषय है।

आसपास रहने वालों की सेहत पर भी असर

हिंडन किनारे रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी रिपोर्ट में चिंता जताई गई है। कुलेसरा स्थित आरोग्य केंद्र में हर महीने 400 से ज्यादा मरीज पहुंचने की बात कही गई है, जिनमें 100 से ज्यादा मरीज त्वचा संबंधी समस्याओं से प्रभावित बताए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के मुताबिक साल 2023 में हिंडन किनारे रहने वाले करीब 2000 लोगों की जांच की गई थी, जिनमें से 800 से ज्यादा लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं पाई गई थीं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 30 फीसद लोगों में स्किन इंफेक्शन की शिकायत सामने आई।

सिर्फ हिंडन नहीं, कई नदियां प्रदूषण की चपेट में

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिंडन के अलावा काली नदी सहित कई नदियों की जल गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में हिंडन के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण का स्तर खास तौर पर गंभीर दिखाई देता है।

ग्रेटर नोएडा के कुलेसरा में सामने आए BOD 82 और 92 लाख कॉलीफॉर्म के आंकड़े यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सिर्फ सफाई अभियान पर्याप्त होंगे या फिर सीवेज के स्रोत को रोकने और ट्रीटमेंट के बाद ही नदीं में पानी छोड़ने जैसे स्थायी उपायों की जरूरत होगी।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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